टाटा संस की अहम बैठक आज, कमजोर प्रदर्शन वाले बिजनेस पर होगी चर्चा
मुंबई। टाटा संस के निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आज, 26 मई 2026 को होने जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस बैठक का मुख्य एजेंडा समूह की उन कंपनियों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करना है जो वर्तमान में भारी घाटे से जूझ रही हैं। हालांकि, इस बात की संभावना बेहद कम है कि वर्तमान चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने या उनकी पुनर्नियुक्ति को लेकर कोई बातचीत होगी। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब समूह के शीर्ष नेतृत्व के बीच अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
कंपनियों के घाटे पर नोएल टाटा की चिंता, 29 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है नुकसान
टाटा ट्रस्ट्स के नवनियुक्त चेयरमैन नोएल टाटा और टाटा संस के प्रमुख एन. चंद्रशेखरन के बीच बीते 23-24 मई को कंपनियों के प्रदर्शन को लेकर लंबी चर्चा हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025 में टाटा समूह के गैर-सूचीबद्ध (अन्लिस्टेड) व्यवसायों को 10,905 करोड़ रुपये का बड़ा नुकसान झेलना पड़ा था, जिसके आगे बढ़कर 29,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। नोएल टाटा विशेष रूप से टाटा डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक्स वेंचर्स और एयर इंडिया जैसे नए कारोबारों के लगातार बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं और वे भविष्य की रणनीति पर ठोस कदम चाहते हैं।
टाटा संस की लिस्टिंग (IPO) को लेकर टकराव की स्थिति
समूह के भीतर एक बड़ा विवाद टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध (लिस्ट) करने को लेकर भी है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने टाटा संस को देश की शीर्ष-15 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) की श्रेणी में रखा है, जिसके नियमों के तहत कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। हालांकि, नोएल टाटा फिलहाल टाटा संस का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने के पक्ष में नहीं हैं। दूसरी तरफ, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और प्रॉक्सी सलाहकार फर्म 'इनगवर्न' का मानना है कि इतनी बड़ी और देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाली होल्डिंग कंपनी को बाजार की पारदर्शिता और कड़े नियमों के दायरे से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
नेतृत्व और ट्रस्टों में बदलाव के बीच आंतरिक मतभेद तेज
हालिया कुछ समय में टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर वैचारिक मतभेद काफी बढ़ गए हैं। बोर्ड के कुछ सदस्यों को हटाने की कोशिशों और चेयरमैन चंद्रशेखरन के कार्यकाल के विस्तार में हो रही देरी ने इन चर्चाओं को और हवा दी है। इस बीच, सांगठनिक स्तर पर भी बदलाव देखे जा रहे हैं, जिसके तहत नोएल टाटा के पुत्र नेविल टाटा को समूह के कुछ महत्वपूर्ण ट्रस्टों में जिम्मेदारी सौंपी गई है। आज होने वाली इस बैठक में घाटे में चल रही व्यक्तिगत कंपनियों के प्रमुख अपने बिजनेस मॉडल और घाटे से उबरने की भावी योजनाओं पर बोर्ड के सामने प्रेजेंटेशन दे सकते हैं।
एयर इंडिया और नए उद्यमों पर रहेगा विशेष दबाव
इस बैठक में मुख्य ध्यान उन नए प्रोजेक्ट्स पर केंद्रित रहेगा जो चेयरमैन चंद्रशेखरन की देखरेख में शुरू किए गए थे लेकिन अभी तक मुनाफे में नहीं आ पाए हैं। सरकार से अधिग्रहित की गई विमानन कंपनी 'एयर इंडिया' भी इस समय बड़े वित्तीय संकट और परिचालन संबंधी चुनौतियों से गुजर रही है। चूंकि टाटा संस समूह की मुख्य निवेश कंपनी (कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी) है, इसलिए विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इसके सूचीबद्ध होने से समूह के भीतर पारदर्शिता और कॉर्पोरेट गवर्नेंस का ढांचा और अधिक मजबूत होगा।

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