गर्मी का कहर बढ़ा, उमंग सिंघार ने प्रदेश में अलर्ट और तैयारी की अपील की
भोपाल। मध्यप्रदेश समेत देश के बड़े हिस्से में पड़ रही भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ तापमान को लेकर सियासत और चिंता दोनों गरमा गई हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लगातार बढ़ते पारे और हीट स्ट्रोक (लू) के खतरों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कई शहरों में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंचना एक गंभीर मानवीय संकट है। सिंघार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि इस जानलेवा तपिश का सबसे क्रूर असर समाज के गरीब तबके, खेतों में काम करने वाले किसानों, दिहाड़ी मजदूरों, सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों और छोटे दुकानदारों पर पड़ रहा है, जिनके लिए वर्तमान सरकारी इंतज़ाम नाकाफी हैं।
अस्पतालों की बदहाली और पानी के संकट पर उठाए सवाल, राहत केंद्र बनाने की मांग
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं और अस्पतालों में लू से पीड़ित मरीजों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में लोग पीने के साफ पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी दर-दर भटकने को मजबूर हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि युद्धस्तर पर कदम उठाते हुए प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर छांव और ठंडे पानी की व्यवस्था की जाए। साथ ही, बेसहारा लोगों के लिए विशेष 'राहत केंद्र' स्थापित किए जाएं ताकि इस प्राकृतिक आपदा से जनहानि को रोका जा सके।
मई के आखिरी हफ्ते में अंगारे उगल रहा आसमान, देश के कई राज्यों में सन्नाटा
वर्तमान में मई का अंतिम सप्ताह पूरे देश के लिए आफत बनकर आया है। मध्य भारत के साथ-साथ उत्तर और पश्चिमी भारत के राज्यों में सूरज की तपिश बर्दाश्त से बाहर हो चुकी है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और मध्यप्रदेश के कई शहरों में दोपहर के समय स्वघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन जाते हैं और व्यस्त सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। मौसम विभाग (IMD) की ओर से लगातार 'रेड और ऑरेंज अलर्ट' जारी कर लोगों को बिना वजह बाहर न निकलने की चेतावनी दी जा रही है।
मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड समेत कई संभागों में रेड अलर्ट, प्रशासन ने बदले नियम
अगर बात मध्यप्रदेश की करें तो भोपाल, ग्वालियर, नौगांव, खजुराहो, छतरपुर, दमोह और पूरे बुंदेलखंड अंचल में गर्म थपेड़ों (लू) ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीण इलाकों में जलस्तर गिरने से पेयजल का संकट और गहरा गया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कई जिला कलेक्टर्स ने स्कूलों के समय में तत्काल बदलाव करने के निर्देश जारी किए हैं। दोपहर के समय बाजारों को बंद रखने या आवाजाही कम करने की सलाह दी जा रही है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स की सलाह: बुजुर्ग, बच्चे और बीमार रखें विशेष ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों का कहना है कि 45 डिग्री से ऊपर का यह तापमान बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से ही गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकता है। डॉक्टरों ने आम जनता से अपील की है कि शरीर में पानी की कमी न होने दें, ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थों का सेवन करें, सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनें और दोपहर 12 से शाम 4 बजे के बीच सीधे धूप के संपर्क में आने से बचें। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी प्रदेश की जनता से इस मौसम में बेहद सतर्क रहने और परिवार के स्वास्थ्य का ख्याल रखने की भावुक अपील की है।

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