Betul Sand Mines Approval: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले में 15 नई रेत खदानें शुरू होना है। इन खदानों की पर्यावरण स्वीकृति के लिए यहां से प्रस्ताव स्टेट लेवल कमेटी को भिजवाया गया है, लेकिन महीनों बाद भी मंजूरी नहीं मिल पाई है। अब अगले महीने रेत खनन पर प्रतिबंध लग जाएगा। ऐसे में अब इन नई खदानों के शुरू होने के लिए लंबा इंतजार करना होगा। नई रेत खदानों के शुरू होने से लोगों को आसानी से रेत मुहैया हो सकेगी। 

जिले के शाहपुर, घोड़ाडोंगरी और चिचोली ब्लॉक में 15 नई रेत खदानें चिन्हित की गई हैं। नई खदानों को शुरू करने से पहले सिया (स्टेट एनवायरमेंटल इम्पेक्ट असेस्मेंट अथॉरिटी) भोपाल से पर्यावरणीय अनुमति लेना होता है। खदानें चिन्हित करने के बाद इनके लिए खनिज विभाग ने जिले से पर्यावरणीय अनुमति के लिए प्रस्ताव सिया को महीनों पहले ही भिजवा दिया है। अभी तक इन खदानों को पर्यावरणीय स्वीकृति नहीं मिल सकी है। यही कारण है कि इन खदानों को शुरू नहीं किया जा सका है। यदि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त हो जाती तो यह खदानें शुरू हो सकती थी। अब हाल-फिलहाल इन खदानों के शुरू होने की उम्मीद भी नहीं है। 

जून में लग जाता है प्रतिबंध 

अब जल्द इन खदानों के शुरू होने की संभावना इसलिए भी कम है क्योंकि नदियों से रेत खनन पर 15 जून से प्रतिबंध लग जाता है। यह प्रतिबंध पूरे मानसून सीजन भर लगा रहता है। ऐसे में यदि इस बीच पर्यावरणीय स्वीकृति मिल भी जाती है तो इन खदानों को शुरू नहीं किया जा सकेगा। 

नई खदानों से इतनी मिलेगी रेत

खनिज विभाग ने जो 15 नई खदानें प्रस्तावित की है, उनसे कुल 9 लाख, 99 हजार, 847 घनमीटर रेत निकलने का अनुमान है। इनमें सबसे ज्यादा क्षमता शाहपुर की गुवाड़ी-3 खदान की 1 लाख, 80 हजार घनमीटर की है। जबकि इसी ब्लॉक की डेंडूपुरा-1 खदान की क्षमता 1 लाख, 27 हजार, 400 घनमीटर रेत की है। एक और बड़ी खदान चिचोली की खपरिया उर्फ परसदा-2 खदान है, जिसकी क्षमता 1 लाख घनमीटर की है। 

खदानें शुरू होने से लोगों को लाभ 

नई खदानें शुरू होने से लोगों को भी लाभ होगा। इससे लोगों को रेत आसानी से मिल सकेगी। यदि नीलामी की जाती है और नए ठेकेदार को यह मिलेगी तो रेट कम होने की संभावना बनेगी। वहीं वर्तमान कंपनी को ही यह खदानें दी जाती है तो भी रेत की उपलब्धता बढ़ने से दामों पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि नई रेत खदानें शुरू होने का लोग भी इंतजार कर रहे हैं। 

यह रेत खदानें हैं प्रस्तावित 

जिले में जो नई रेत खदानें शुरू होना है, उनमें घोड़ाडोंगरी की चिचडोल रैयत (रकबा 2.620 हेक्टेयर), बांसपुर (रकबा 3.500 हेक्टेयर), कैली रैयत (रकबा 2.300 हेक्टेयर), हिरनघाटी (रकबा 1.750 हेक्टेयर), चिचोली ब्लॉक की खपरिया उर्फ परसदा-1 (रकबा 1.550 हेक्टेयर) और खपरिया उर्फ परसदा-2 (रकबा 5 हेक्टेयर), शाहपुर ब्लॉक की तेंदूखेड़ा (रकबा 4.100 हेक्टेयर), गुवाड़ी-1 (रकबा 5 हेक्टेयर), गुवाड़ी-2 (रकबा 4.500 हेक्टेयर), डेंडूपुरा-1 (रकबा 4.590), डाबरी (रकबा 4.500 हेक्टेयर), गुवाड़ी-3 (रकबा 4.950 हेक्टेयर), गुरगुंदा-1 (रकबा 4.900 हेक्टैयर) और गुरगुंदा-2 (रकबा 4.800 हेक्टेयर) शामिल हैं।