Tribal Department Tender Approval: जनजातीय विभाग के टेंडर अब कलेक्टर करेंगे मंजूर, बैतूल के विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार
Tribal Department Tender Approval: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिले सहित प्रदेश के सभी जनजातीय बाहुल्य जिलों में अब जनजातीय कार्य विभाग के निर्माण कार्यों के साथ ही मरम्मत के टेंडर स्वीकार करने के ठेके और अनुबंध को अंतिम मंजूरी देने का अधिकार कलेक्टर को दे दिया गया है। अभी तक निर्माण कार्यों की स्वीकृति के लिए फाइल भोपाल जाती थी। जहां विभागीय अधिकारियों के दफ्तरों में देरी हो जाती थी, जिससे विकास कार्य लेट होते थे। लेकिन, अब कलेक्टर को पॉवर मिलने से प्रशासनिक लेटलतीफी खत्म होगी। वहीं विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ेगी। वित्त विभाग ने मध्यप्रदेश बुक ऑफ फायनेंशियल पॉवर्स में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए इस संबंध में कलेक्टर को अधिकार दे दिए हैं। इस निर्णय से अब जनजातीय कार्य विभाग द्वारा जिले के घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, भीमपुर, भैंसदेही, चिचोली और आठनेर ब्लॉक में स्कूल, हॉस्टल, खेल मैदान सहित अन्य निर्माण कार्य के साथ ही मरम्मत के टेंडर जिला स्तर पर कलेक्टर द्वारा ही स्वीकृत किए जा सकेंगे।
अभी तक विभागीय स्तर पर स्वीकृत होते थे टेंडर
जनजातीय कार्य विभाग के निर्माण कार्यों में अभी निर्माण कार्यों के टेंडर, ठेके और अनुबंधों को अंतिम मंजूरी देने का सीधा अधिकार कलेक्टर के पास नहीं था। यह पूरी तरह से एक विभागीय तकनीकी ढांचे के अंतर्गत होता था। जिसमें केवल विभाग के कार्यपालन यंत्री, अधीक्षण यंत्री या विभाग अध्यक्ष के स्तर पर ही फाइलें चलती थीं। जिसके लिए किसी भी निर्माण कार्यों की फाइलें संभागीय मुख्यालय और मंत्रालय जाती थी। जिससे निर्माण कार्य स्वीकृत करवाने बार-बार चक्कर काटने पड़ते थे। इससे जनजातीय क्षेत्र में होने वाले विकास कार्य लेट हो जाते थे।
अब कलेक्टर को दिए पॉवर
वित्त विभाग ने मध्यप्रदेश बुक ऑफ फायनेंशियल पॉवर्स में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए अब जनजातीय कार्य विभाग के टेंडर्स, एग्रीमेंट स्वीकार करने के साथ-साथ निविदा दरें स्वीकार करने के अधिकार भी कलेक्टर को दे दिए हैं। जिससे अब आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल, हॉस्टल, खेल मैदान सहित अन्य विभागीय भवनों के निर्माण कार्य और मरम्मत टेंडर्स की फाइलों पर कलेक्टर त्वरित निर्णय लेकर स्वीकृति दे सकेंगे। इसके लिए कलेक्टर को विभाग के अधीक्षण यंत्री (एसई) के समान वित्तीय अधिकार दे दिए गए हैं। इस व्यवस्था में तकनीकी नियंत्रण बनाए रखने के लिए कलेक्टर को इन निर्माण कार्यों की स्वीकृति देने के पूर्व जनजातीय कार्य विभाग के कार्यपालन यंत्री का तकनीकी और विभागीय अभिमत प्राप्त करना अनिवार्य किया गया है।
जिले के 6 विकासखंडों के निर्माण कार्यों में आएगी गति
बैतूल जिले के 10 में से 6 विकासखंड घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, चिचोली, भीमपुर, भैंसदेही और आठनेर जनजातीय बाहुल्य क्षेत्र हैं। जनजातीय कार्य विभाग द्वारा इन ब्लॉकों में स्कूल, हॉस्टल, खेल मैदान के साथ ही अन्य निर्माण कार्य भी करवाए जाते हैं। साथ ही बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य भी करवाए जाते हैं। साथ ही बड़े स्तर पर मरम्मत कार्य होते हैं। इसके लिए फाइलें संभागीय मुख्यालय और मंत्रालय में कई दिनों तक लंबित रहने से छुटकारा मिल जाएगा। अब कलेक्टर जिला स्तर पर ही निर्माण कार्यों के टेंडर स्वीकृत कर एग्रीमेंट भी कर सकेंगे। जिससे इन सभी छह विकासखंडों में जनजातीय कार्य विभाग के कार्यों में गति आएगी।

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