Farmer Registry Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। शासन ने खाद वितरण को लेकर ई-टोकन की व्यवस्था तो बना दी, लेकिन इसके लिए पर्याप्त इंतजाम ही नहीं किए। आलम यह है कि अभी तक फार्मर रजिस्ट्री और बकेट क्लेमिंग का 50 प्रतिशत कार्य भी नहीं हो पाया है। इसके चलते किसानों को उनकी जमीन की जरुरत के हिसाब से खाद ही नहीं मिल रही है। कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे ने इसे गंभीरता से लेते हुए आदेश दिए हैं कि समिति स्तर पर शिविर लगाए जाएं और यह कार्य शत प्रतिशत किया जाएं ताकि किसानों को पर्याप्त खाद समय रहते मिल सके। 

गौरतलब है कि राज्य शासन के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने 26 मार्च 2026 को आदेश जारी कर खाद वितरण को लेकर नई व्यवस्था बनाई है। इसके तहत अब खाद का वितरण ई-विकास प्रणाली पोर्टल के माध्यम से ही किया जाना है। इस प्रणाली में किसानों को खाद के लिए ई-टोकन जारी किए जाते हैं। इस टोकन के आधार पर ही किसानों को खाद मिलती है। बिना ई-टोकन के किसी भी हालत में खाद की बिक्री नहीं की जा सकती है। यहां तक कि ई-टोकन के बिना खाद की बिक्री किए जाने पर जिले में कई अधिकारियों पर निलंबन की गाज तक गिर चुकी है। 

ई-टोकन से ऐसे होता है निर्धारण 

ई-टोकन में किस किसान को कितनी खाद मिलेगी, इसके निर्धारण का भी एक पैमाना है। इसके लिए फार्मर रजिस्ट्री से किसानों की जितनी भूमि लिंक है, उतनी ही खाद के लिए किसानों को पात्र माना जाता है। उससे एक बोरी ज्यादा भी खाद किसानों को नहीं दी जा सकती। इधर जिले के किसान लंबे समय से इस बात की शिकायत कर रहे थे कि उनकी जितनी भूमि है, उतनी खाद उन्हें नहीं मिल रही है। यहां तक कि खुद शासन ने एक एकड़ जमीन के आधार पर जितनी खाद का पात्र माना है, उतनी खाद भी नहीं दी जा रही है। 

समीक्षा बैठक में खुला यह राज 

इस बात को देखते हुए कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे ने कृषि विभाग की समीक्षा की तो यह पाया कि एग्रीस्टेक पोर्टल पर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री एवं बकेट क्लेमिंग के कार्य में इस समय तक प्रगति 50 प्रतिशत से भी कम है। चूंकि ई-विकास प्रणाली के अंतर्गत फार्मर रजिस्ट्री से लिंक जमीन के अनुपात में ही फसल के अनुसार खाद प्रदाय की जानी है, इसलिए किसानों को वास्तविक जमीन के अनुसार खाद नहीं मिल रही है। इससे उन्हें न केवल परेशान होना पड़ रहा है बल्कि खासा आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। 

कलेक्टर ने दिए यह सख्त निर्देश 

इसे देखते हुए कलेक्टर डॉ. सोनवने ने आदेश जारी किए हैं कि किसानों के शत प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री और बकेट क्लेमिंग के कार्य हेतु 28 मई से 5 जून 2026 के बीच प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति स्तर पर शिविर लगाएं जाएं। निर्धारित शिविरों में उक्त समिति के अंतर्गत आने वाले सभी ग्रामों के किसानों को फार्मर आईडी बनवाने और छूटे हुए खसरों को जोड़ने के लिए आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के लिए मुनादी कराई जाएं। इन शिविरों के जरिए फार्मर रजिस्ट्री व बकेट क्लेमिंग से वंचित किसानों की शत प्रतिशत निजी भूमि को फार्मर आईडी से लिंक किया जाएं। इन शिविरों के लिए सभी एसडीएम को नोडल अधिकारी एवं जनपद पंचायत के सीईओ को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। 

शिविरों के लिए कई विभागों को जिम्मा

इन शिविरों के लिए कई विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजस्व विभाग के पटवारी द्वारा किसानों की फार्मर आईडी बनाने और सभी खसरों को फार्मर आईडी से लिंक करने का कार्य किया जाएगा। कृषि विभाग, पंचायत सचिव और रोजगार सहायकों को किसानों के ई-टोकन बुक करना है। वहीं समिति स्तर पर सहकारिता विभाग द्वारा समिति के सदस्यों के ई-टोकन बुकिंग का कार्य किया जाएगा। किसानों को इन शिविरों में आधार कार्ड, भूमि स्वामित्व प्रमाण हेतु खसरा-खतौनी, मोबाइल नंबर, समग्र आईडी, मृत किसान की स्थिति में परिजनों द्वारा मृत्यु प्रमाण पत्र एवं अन्य परिजनों का सहमति पत्र लाना आवश्यक होगा। 

हाट बाजार लगने वाले दिन शिविर 

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में साफ निर्देशित किया गया है कि शिविरों का आयोजन उक्त अवधि में संबंधित समिति के हाट बाजार लगने वाले दिन किया जाएं। दिन का निर्धारण करने एवं संपूर्ण शिविरों के संचालन एवं कार्य प्रगति हेतु संबंधित तहसीलदार उत्तरदायी होंगे। शिविर का समन्वय अनुविभागीय अधिकारी एवं वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा किया जाएगा। शिविर की जानकारी रोजाना निर्धारित प्रपत्र में संयुक्त हस्ताक्षर से कलेक्टर को उपलब्ध कराना होगा।