Betul Mandi: मंडी या व्यापारियों का डंपिंग यार्ड? अफसरों की सख्ती के बावजूद बोरों से अटे पड़े हैं शेड; नई व्यवस्था पर लापरवाही का ग्रहण
Betul Mandi: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। कृषि उपज मंडी प्रबंधन के लचर एवं ढीले रवैये से व्यवस्थाएं सुधारने का नाम नहीं ले रही है। कलेक्टर और भारसाधक अधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बावजूद व्यापरियों ने कृषि उपज मंडी परिसर को डंपिंग पाइंट बना लिया है। मंडी प्रबंधन की लापरवाही और ढीले रवैये से न तो वे व्यापारियों से समय पर बोरे उठवा पाए और ना ही जुर्माना वसूल पा रहे है। रविवार को कृषि उपज मंडी में नीलामी बंद होने के बावजूद मंडी के सभी शेड के साथ ही परिसर में भी कुछ स्थानों पर व्यापारियों के बोरे रखे हुए है। मंडी परिसर में रविवार शाम तक लगभग १० हजार से अधिक बोरे रखे हुए थे, जिन्हें देखकर यहीं लग रहा है कि मंडी प्रबंधन वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश को हवा में उड़ा रहा है।
कृषि उपज मंडी में सोमवार से नीलामी की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। गेहूं और मक्का के साथ ही सोयाबीन के लिए शेड निर्धारित किए गए है। किसानों से निर्धारित शेड में ही उपज खाली करने की अपील की गई है, लेकिन मंडी प्रबंधन नई व्यवस्था के लिए भी मंडी के शेड खाली नहीं करवा पाए है। लगभग सभी शेड में व्यापारियों के बोरों के चौकड़े लगे हुए है। जिससे किसानों की उपज के लिए शेड में काफी कम जगह बची है। किसानों को भीषण गर्मी में भी खुले आसमान के नीचे उपज के ढेर लगाने पड़ेगे। शेड के बाहर भी कुछ स्थानों पर व्यापारियों के बोरे के चौकड़े लगे है। जिन्हें उठवाने के लिए मंडी प्रबंधन द्वारा किसी प्रकार की पहल नहीं की जा रही है।
मंडी प्रबंधन की व्यापारियों से मिलीभगत की आशंका
कृषि उपज मंडी के भारसाधक अधिकारी एवं बैतूल एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने नवागत कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देश पर १७ अप्रैल को व्यापारियों की बैठक लेकर स्पष्ट निर्देश दिए थे कि २१ अप्रैल के बाद मंडी परिसर में निर्धारित समय सीमा (२४ घंटे) में माल का उठाव करे। डॉ. अभिजीत सिंह ने बैठक में कहा मंडी परिसर से २४ घंटे में माल उठाव करना मंडी प्रशासन और मंडी सचिव की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि भविष्य में निर्धारित समयावधि तक मंडी प्रांगण से चौकड़ों का उइाव नहीं किया गया तो उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित करते हुए दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी तथा शासन को होने वाली क्षति की वसूली मंडी सचिव के वेतन से की जाएंगी।
एसडीएम के उक्त निर्देश के बावजूद व्यापारी मंडी प्रांगण से २४ तो दूर ४८ घंटे में भी सभी बोरे नहीं उठा पा रहे है। बावजूद इसके मंडी सचिव बोरे नहीं उठाने वाले व्यापारियों के खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई नहीं कर रहा है। ऐसा लगता है कि मंडी प्रबंधन की व्यापारियों से मिलीभगत है। इसलिए जुर्माना नहीं लगाया जा रहा है, जिससे भले ही शासन को हजारों रूपए प्रतिदिन राजस्व का नुकसान हो जाए, लेकिन व्यापारियों को नुकसान नहीं किया जा रहा है। सोमवार को भी किसानों को भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे उपज उतारने मजबूर होना पड़ेगा।

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