फर्जी पासपोर्ट से पर्दाफाश: तुर्किये में छिपा था सलीम डोला
मुंबई: अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी की दुनिया के एक बड़े मोहरे मोहम्मद सलीम डोला को भारतीय जांच एजेंसियां तुर्किये से वापस भारत लाने में सफल रही हैं। 5000 करोड़ रुपये के नशीले पदार्थों के काले कारोबार का मास्टरमाइंड डोला इस्तांबुल में अपनी पहचान बदलकर रह रहा था। भारत लाए जाने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने उसे मुंबई की विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उसे 8 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
फर्जी पासपोर्ट और 'हमजा' की पहचान: इस्तांबुल में ऐसे छिपा था डोला
जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि सलीम डोला तुर्किये में खुद को 'हमजा' नाम के व्यक्ति के रूप में पेश कर रहा था। उसने वहां रहने के लिए बुल्गारिया का पासपोर्ट इस्तेमाल किया था। जांच एजेंसियां अब इस बात की तस्दीक कर रही हैं कि यह पासपोर्ट असली था या इसे फर्जी तरीके से तैयार किया गया था। डोला के खिलाफ इंटरपोल ने 'रेड कॉर्नर नोटिस' जारी किया था, जिसके बाद मार्च 2024 में उसे इस्तांबुल में दबोचा गया। एनसीबी के मुताबिक, वह 2023 के चर्चित मुंबई मेफेड्रोन (Mephedrone) मामले का मुख्य सप्लायर है।
आतंकवाद और ड्रग मनी का कनेक्शन: एजेंसियां खंगाल रही हैं वित्तीय नेटवर्क
सलीम डोला की गिरफ्तारी को इस ड्रग नेटवर्क की कमर टूटने के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले जून 2025 में उसके बेटे ताहिर डोला को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत लाया गया था। अधिकारियों का मानना है कि इस 5000 करोड़ रुपये के नेटवर्क से होने वाली कमाई का बड़ा हिस्सा देश की सुरक्षा को अस्थिर करने वाली गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाता था। जांच दल अब उस वित्तीय चैन को ट्रैक कर रहा है जो ड्रग तस्करी और आतंकी फंडिंग के बीच एक कड़ी का काम कर रही थी। डोला से पूछताछ में अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट के कई और बड़े नामों का खुलासा होने की उम्मीद है।

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