स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जनता भड़की, आयोग को भेजा पत्र
यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर बढ़ा विवाद: उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से की प्रक्रिया रोकने की मांग
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के फैसले के खिलाफ राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद ने विद्युत नियामक आयोग को एक औपचारिक पत्र सौंपकर इन मीटरों को जबरन थोपे जाने का कड़ा विरोध किया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सीधे हस्तक्षेप की अपील की है।
मीटर लगाने की जल्दबाजी पर सवाल
उपभोक्ता परिषद ने पाॅवर कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब केंद्र सरकार की 'रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम' (RDSS) के तहत मीटर बदलने की समय-सीमा 31 मार्च 2028 तक बढ़ाई जा चुकी है, तो यूपी में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है? परिषद का दावा है कि प्रदेश के लगभग 75 लाख घरों में बिना उपभोक्ताओं की सहमति के ये मीटर लगाए जा रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है।
उपभोक्ताओं को मिले विकल्प
परिषद का तर्क है कि कई अन्य राज्यों में उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का विकल्प दिया जा रहा है। इसके विपरीत, उत्तर प्रदेश में नए कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को अनिवार्य रूप से केवल प्रीपेड मीटर ही दिए जा रहे हैं। इसी नीति के विरोध में वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज जैसे बड़े शहरों में विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है।
तकनीकी सटीकता पर उठाए सवाल
अवधेश कुमार वर्मा ने तकनीकी खामियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि:
-
केवल मीटर की जांच करना काफी नहीं है; पूरे बिलिंग सिस्टम (MDM, HES और क्लाउड) का एक साथ परीक्षण होना चाहिए।
-
जब तक रोजाना की प्रीपेड बिलिंग का डेटा सटीक न हो, तब तक मीटर जंपिंग और गलत रीडिंग की समस्याओं का समाधान नहीं हो पाएगा।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार
उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जब तक तकनीकी पारदर्शिता और जनता के हितों से जुड़े सभी सवालों के जवाब नहीं मिल जाते, तब तक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने के अभियान को तुरंत रोक दिया जाए।
इस विवाद का असर नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है, जहाँ व्यापारियों और आम लोगों ने मीटर की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। प्रशासन की ओर से अब तक इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, जिससे उपभोक्ताओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

Betul Air Force Candidate Death: एयरफोर्स ज्वाइनिंग से एक दिन पहले युवक की मौत, कुएं में मिला शव, सड़क पर उतरे ग्रामीण
Madhya Pradesh Bus Strike: 7 अगस्त तक सरकार को अल्टीमेटम, नहीं मानी मांगें तो थम जाएंगे बसों के पहिए