Dignity of Beneficiaries: 'राजा-रानी' का जमीन पर बैठकर भोजन करना शर्मनाक! कलेक्टर की छवि पर बट्टा लगाने में अफसर नहीं छोड़ रहे कसर
► डॉ. मयंक भार्गव ♦
Dignity of Beneficiaries: ऐसा कहा जाता है कि जिंदगी जन्म एक बार होता है...! मृत्यु भी एक ही बार होती है...! और व्यक्ति सेवानिवृत्ति भी एक ही बार होता है...! वहीं अमूमन शादी भी जीवन में एक ही बार होती है। जिसकी शादी होती है उसे राजा के जैसा सभी ट्रीट करते हैं। वहीं दुल्हन को भी रानी की तरह ही ट्रीट किया जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के आयोजनों में यह देखा जा रहा है कि दुल्हा-दुल्हन याने (राजा और रानी) भोजन लेने के लिए लाइन में खड़े होकर अपना नंबर आने का इंतजार करते हैं और जद्दोजहद के बाद यदि भोजन मिल भी गया तो उन्हें एक अदद कुर्सी तक नसीब नहीं होती है जिससे उन्हें जमीन पर बैठकर बिना चटाई के भोजन करने को मजबूर होना पड़ता है।
जरा सी कल्पना कीजिए कि जिसकी भी शादी होती है उसके कितने अरमान रहते हैं। मैं दुल्हा या दुल्हन बनूंगी। मेरे पीछे सब चलेंगे और मैं घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर निकलूंगा। चहुंओर नाच-गाना होगा। मुझे पूरा आदर-सम्मान मिलेगा। वहीं दुल्हन की यह सोच रहती है कि जब मैं हाथों में माला लेकर वरमाला करने के लिए सहेलियों के साथ निकलूंगी तो सभी की नजरें मुझ पर भले ही होगी लेकिन मैं नजरें झुकाकर चलती हुई सीधे स्टेज पर जाऊंगी जो कि मेरे और मेरे राजा जी (दुल्हे) के लिए बनाया गया है। यहां पर जाकर हम दोनों एक-दूसरे को वर माला पहनाएंगे और मंगल गीत गाए जाएंगे। आतिशबाजी होगी। बैंडबाजें बजेंगे।
वैसे तो कलेक्टर को जिले का राजा कहा जाता है लेकिन विवाह मंडप में दुल्हा-दुल्हन ही राजा-रानी होते हैं। यहां पर जिले के राजा से राष्ट्रीय जनादेश की अपील है कि चूंकि आपको भी राजा माना जाता है इसलिए अपने मातहतों (अफसरों) को कम से कम इतनी तो ताकीद जरूर करें कि विवाह के मंडप में दुल्हन-दुल्हन को बिना चटाई के जमीन पर बैठकर भोजन करने को मजबूर ना होना पड़े। गरीब को तो जहां बैठाओगे वह वहां पर बैठ जाएगा लेकिन एक दिन क्या कुछ समय के लिए उसे भी कम से कम आप राजा-रानी (दुल्हन-दुल्हन) बनने का अवसर जरूर प्रदान कर सकते हैं। यह शाश्वत सत्य है कि मध्यप्रदेश शासन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की महत्वाकांक्षी इस योजना में गरीब दुल्हा-दुल्हन को कम से कम सम्मान पूर्वक विवाह कराने का मौका मिले। आपसे अपेक्षा है कि इस तरह से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह कन्या योजना में दुल्हा-दुल्हन को जमीन पर बैठकर भोजन कतई ना कराएं। जिस तरह से अफसर कुर्सी और टेबल पर बैठकर भोजन का स्वाद लेते हैं ठीक इसी तर्ज पर दुल्हा-दुल्हन के लिए भी बैठक व्यवस्था बनाने के निर्देश दें ताकि दुल्हा-दुल्हन भी ससम्मान एक समय का भोजन करने में गर्व महसूस कर सकें।
कलेक्टर साहब मेरा आपको यह सुझाव भी है कि अगर प्रशासन के पास बैठक व्यवस्था नहीं हो पा रही है तो किसी भी स्कूल से डेस्क -बैंच बुलवा सकते हैं जो कि टेबल और कुर्सी दोनों का काम कर सकती है। कलेक्टर साहब चूंकि आप जिले के राजा हैं इसलिए आपसे यह अपेक्षा भी की जा रही है कि जिस तरह से जिला मुख्यालय बैतूल और भीमपुर में हुए मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में दुल्हा-दुल्हन जमीन पर बैठकर भोजन कर रहे थे यह बिल्कुल शर्मनाक था? कल्पना कीजिए कि दुल्हा-दुल्हन और उसके परिजन क्या सोच रहे होंगे कि जिला प्रशासन के पास इतनी भी व्यवस्था नहीं है वह हमें सम्मान से एक समय का कुर्सी-टेबल पर बैठाकर भोजन करा सके। आपसे उम्मीद और अपेक्षा करता हूं कि आज घोड़ाडोंगरी में होने वाले मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह में इस तरह का शर्मनाक नजारा दिखाई नहीं देगा।

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