Groundwater crisis Betul: बैतूल में गहराया जल संकट: गिरते भूजल स्तर के कारण हैंडपंप उगल रहे हवा, 40 नए बोर हुए खनन
Groundwater crisis Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। गर्मी बढ़ने के साथ-साथ भूजल स्तर (वाटर लेवल) भी लगातार गिरता जा रहा है। यही कारण है कि हैंडपंपों और ट्यूबवेलों में लगातार पाइप बढ़ाना पड़ रहा है। जहां जरुरत है, वहां पर नए बोर खनन भी किए जा रहे हैं। जल स्तर गिरने से बंद होने वाले हैंडपंपों की संख्या भी बढ़ती जा रही है।
जल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा नए निजी बोर खनन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके बावजूद पूर्व के जल स्रोतों से लगातार पानी निकल रहा है। यही कारण है कि जिले में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। जल स्तर के नीचे जाने का सीधा असर टयूबवेलों और हैंडपंपों पर पड़ता है। ऐसे में इनमें पाइप बढ़ाना पड़ रहा है। हर दिन कई क्षेत्रों से पाइप बढ़ाए जाने की डिमांड आती है। इसके चलते पीएचई कार्यालय से रोजाना वाहन पाइप लेकर निकलते हैं और यह उन ट्यूबवेलों और हैंडपंपों में पाइप डाले जा रहे हैं, जहां जरुरत पड़ रही है।
नए बोर की भी पड़ रही जरुरत
जिले में कई ऐसे बोर हैं जो कि पूरी तरह सूख चुके हैं। ऐसे बोरों के सहारे ही जलापूर्ति होने से पूरे क्षेत्र में जल संकट की स्थिति बन जा रही है। ऐसे में इन क्षेत्रों में नए बोर खनन भी किए जा रहे हैं। पीएचई विभाग के अनुसार अभी तक पंचायतों एवं पीएचई विभाग द्वारा करीब 40 नए बोर खनन कर जल संकट से राहत दिलाने का प्रयास किया गया है। यह बोर खनन पिछले 15 से 20 दिनों में ही किए गए हैं। इनमें ज्यादातर मुलताई, प्रभातपट्टन, भीमपुर, बैतूल ब्लॉकों में किए गए हैं। कुछ अन्य क्षेत्रों में भी किए गए हैं।
बंद होते जा रहे हैं हैंडपंप
कई इलाके ऐसे हैं जहां पर आज भी लोग पानी के लिए हैंडपंपों पर ही निर्भर हैं। ऐसे में जल स्तर गिरने से हैंडपंप भी पानी की जगह हवा उगलने लगे हैं। जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 12 हजार हैंडपंप हैं। इनमें से 4 से 5 सौ हैंडपंप जल स्तर गिरने से बंद हो चुके हैं तो वहीं 3 से 4 सौ हैंडपंप पानी कम होने से कम क्षमता से पानी दे पा रहे हैं। इनके भी जल्द पूरी तरह से बंद हो जाने की संभावना है।
जरुरत पड़ी तो निजी बोर भी लेंगे
पीएचई विभाग ने योजना बना रखी है कि जल स्रोत सूखने और नए बोर खनन में भी पानी निकलने पर पानी की व्यवस्था करने किसानों के निजी बोर भी लिए जाएंगे ताकि लोगों को परेशान न होना पड़े। वैसे तो वर्तमान में 1100 नल-जल योजनाएं भी संचालित होने के दावें किए जाते हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश कागजों में ही चल रही हैं। लोगों को इससे भी जल संकट झेलना पड़ रहा है।

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