Illegal colonies in Betul: अवैध कॉलोनियों की वैधता पर ब्रेक: अधिसूचना के बाद अटकी प्रक्रिया, बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे निवासी
Illegal colonies in Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिला मुख्यालय पर अवैध कॉलोनियों को वैध करने की बीते साल शुरू हुई प्रक्रिया केवल अधिसूचना जारी करने तक ही सिमट कर रह गई है। अधिसूचना जारी होने के बाद कुछ कॉलोनाइजरों को नोटिस दिए गए तो कुछ को वह भी नहीं दिए जा सके। इसके बाद आज तक न तो किसी भी कॉलोनी का विकास शुल्क जमा हुआ और न ही वसूल करने की पहल ही हो सकी। इसके चलते इन अवैध कॉलोनियों में मोटी रकम खर्च कर प्लॉट लेने और मकान बनाने वाले लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
बैतूल शहर में भी अवैध कॉलोनियों की भरमार है। लोग सस्ते के चक्कर में इन कॉलोनियों में प्लॉट लेकर मकान तो बना लेते हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर वहां कुछ नहीं मिल पाता है। बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं भी यहां मुहैया नहीं हो पाती। ऐसी कॉलोनियों में जरुरी सुविधाएं उपलब्ध कराकर इन कॉलोनियों का विकास करने की पहल 2 साल पहले की गई थी। इसके तहत बाकायदा सर्वे कराया गया था और यह आकलन भी किया गया था कि इन कॉलोनियों में अधोसंरचनात्मक सुविधाएं उपलब्ध कराने कितनी राशि खर्च करना होगा। यह राशि संबंधित कॉलोनाइजरों या फिर वहां निवास करने वालों से वसूल की जानी थी।
शहर में मिली थी 93 कॉलोनियां
प्रशासन और नगर पालिका द्वारा किए गए सर्वे में 31 दिसंबर 2016 के पहले अस्तित्व में आईं 93 कॉलोनियां मिली थी। इस पर प्रशासन ने मध्यप्रदेश पालिका (कॉलोनी विकास) नियम 2021 के तहत 16 फरवरी 2025 को अधिसूचना जारी की थी। इसके बाद कुछ को नोटिस भी जारी किए गए, लेकिन इसके आगे बात नहीं बढ़ सकी। नतीजतन, इन कॉलोनियों को आज भी वैध नहीं किया जा सका है।
कार्यों के लिए इतनी राशि की दरकार
इन कॉलोनियों में विभिन्न विकास कार्यों के लिए अनुमानित राशि 106 करोड़ रुपये से अधिक की आंकी गई थी। इनमें सबसे ज्यादा 14 करोड़, 38 लाख रुपये की राशि बदनूरढाना की एक कॉलोनी से ली जानी थी। यह राशि कॉलोनाइजरों और उनके न होने पर इन कॉलोनियों के प्लॉट-मकान मालिकों से वसूल की जानी थी। लेकिन राशि वसूली को लेकर किसी ने भी गंभीरता नहीं दिखाई जिससे इसके बाद कुछ भी नहीं हो सका।
महज एक कॉलोनी में पार्क की जमीन
इन अवैध कॉलोनियों में से सबसे ज्यादा 34 कॉलोनियां टिकारी की है। इनके अलावा हमलापुर में 18, खंजनपुर में 15, बदनूरढाना में 14, गौठाना में 11 और खकरा जामठी में 1 अवैध कॉलोनी है। इनमें से पार्क के लिए महज 1 कॉलोनी में जगह है वहीं 2 कॉलोनियां ऐसी हैं, जहां पर प्लॉट बेचने के बाद कोई जमीन ही नहीं बची है। अधिकांश में नाम के लिए जगह तो बची है, लेकिन इतनी नहीं कि उन्हें बेच कर राशि वसूल की जा सके या और कोई उपयोग किया जा सके।
इन कारणों से नहीं हो रही वसूली
राशि वसूल नहीं हो पाने की सबसे बड़ी वजह यह है कि नगर पालिका के पास इतने पॉवर और अमला नहीं है कि वह वसूली कर सके। दूसरी ओर प्रशासन के पास अन्य दूसरे काम भी है। जिसके चलते वह भी इस कार्य में रूचि नहीं ले रहा है। यही कारण है कि कॉलोनियों को वैध करने की यह प्रक्रिया केवल अधिसूचना जारी होने तक ही सिमट कर रह गई है।
लोगों को नहीं मिल रही सुविधाएं
इन सबका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मोटी रकम खर्च कर प्लॉट लेने और मकान बनाने के बावजूद उन्हें आधारभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही है। वे नगर पालिका के पास सुविधाओं की मांग लेकर पहुंचते भी हैं तो उन्हें टका सा जवाब मिल जाता है कि कॉलोनी अवैध होने के कारण वहां कोई काम नहीं कराए जाएंगे। इन सभी से लोग खासे परेशान हैं।

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