राघव चड्ढा समेत ‘आप’ के 7 सांसद BJP में शामिल, संजय सिंह ने उठाए सवाल
नई दिल्ली: यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति और विशेषकर आम आदमी पार्टी (आप) के लिए एक ऐतिहासिक और चुनौतीपूर्ण मोड़ है। राज्यसभा में इस बड़े फेरबदल ने न केवल सदन के गणित को बदला है, बल्कि दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) पर भी एक नई बहस छेड़ दी है।
1. राज्यसभा का नया समीकरण
इस विलय के बाद उच्च सदन में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल गया है:
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आप की स्थिति: 10 सांसदों वाली पार्टी अब केवल 3 सांसदों तक सिमट गई है। इससे सदन में पार्टी की आवाज और विधायी प्रभाव काफी कम हो जाएगा।
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भाजपा की मजबूती: 7 नए सदस्यों के आने से भाजपा को महत्वपूर्ण बिल पास कराने में और अधिक आसानी होगी।
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आधिकारिक मुहर: संसद की वेबसाइट पर अब अशोक मित्तल और राघव चड्ढा समेत सातों सांसदों का नाम भाजपा सदस्यों के रूप में दर्ज है।

3. प्रमुख नेताओं के तर्क
संजय सिंह (आप नेता):
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उनका आरोप है कि भाजपा ने केंद्रीय एजेंसियों (जैसे छापे) का डर दिखाकर सांसदों को तोड़ा है।
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उन्होंने सभापति से अपील की है कि इन सांसदों की सदस्यता रद्द की जाए, क्योंकि यह जनादेश का अपमान है।
राघव चड्ढा (पूर्व आप सांसद):
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उन्होंने अपने फैसले को "नैतिकता" और "निजी स्वार्थों से मुक्ति" के तौर पर पेश किया है।
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उनका दावा है कि आम आदमी पार्टी अपनी मूल विचारधारा से भटक चुकी है, जिसके कारण उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
4. आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें राज्यसभा सभापति के अगले कदम पर हैं:
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याचिका पर सुनवाई: सभापति को संजय सिंह द्वारा दायर अयोग्यता याचिका पर निर्णय लेना होगा।
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कानूनी चुनौती: यदि सभापति का फैसला आप के पक्ष में नहीं आता है, तो पार्टी इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है।
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राजनीतिक प्रभाव: दिल्ली और पंजाब (जहाँ से ये सांसद आते हैं) की राजनीति पर इसका गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि यह पार्टी के भीतर के असंतोष को उजागर करता है।

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