राघव चड्ढा ने खोले इस्तीफे के राज, कहा—‘मेरे पास 3 ऑप्शन थे’
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में राघव चड्ढा ने भावुक होते हुए उन परिस्थितियों का जिक्र किया, जिन्होंने उन्हें 15 साल पुराने साथ को तोड़ने पर मजबूर किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के भीतर जिस तरह से उन्हें दरकिनार किया गया, उसके बाद उनके सामने केवल तीन ही विकल्प बचे थे:
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खामोश रहकर गलत का हिस्सा बने रहना: उन्होंने कहा कि पहला रास्ता यह था कि वह पार्टी के उन फैसलों और 'अपराधों' पर चुप्पी साध लें, जिनसे उनकी अंतरात्मा सहमत नहीं थी।
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अपनी आवाज दबाकर राजनीति से संन्यास लेना: दूसरा विकल्प घर बैठ जाना और सार्वजनिक जीवन से दूरी बना लेना था।
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राष्ट्रहित में एक नई शुरुआत करना: तीसरा रास्ता था उस पार्टी को छोड़ना जो अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है और देशहित में किसी नए मंच से जनता की सेवा करना। उन्होंने इसी तीसरे रास्ते को चुना।
विवाद की मुख्य वजहें
इस सियासी 'तलाक' के पीछे कई महीनों से चल रही खींचतान मुख्य कारण रही:
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डिप्टी लीडर पद से हटाया जाना: 2 अप्रैल 2026 को AAP ने अचानक राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के 'डिप्टी लीडर' पद से हटाकर अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी दे दी थी।
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बोलने पर पाबंदी: पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से अनुरोध किया था कि चड्ढा को पार्टी के कोटे से बोलने का समय न दिया जाए, जिसे उन्होंने अपनी आवाज दबाने की कोशिश बताया।
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सिद्धांतों से भटकाव का आरोप: चड्ढा ने स्पष्ट रूप से कहा कि जिस पार्टी को उन्होंने अपने खून-पसीने से सींचा, वह अब अपने मूल्यों से भटक गई है। उन्होंने खुद को "गलत पार्टी में सही आदमी" करार दिया।
AAP को लगा 'महा-झटका'
राघव चड्ढा अकेले नहीं गए हैं, बल्कि उन्होंने आम आदमी पार्टी की संसदीय ताकत को आधा कर दिया है:
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7 सांसदों का पलायन: राघव चड्ढा के नेतृत्व में कुल 7 राज्यसभा सांसदों (जिनमें स्वाति मालीवाल, हरभजन सिंह और संदीप पाठक जैसे नाम शामिल हैं) ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है।
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एंटी-डिफेक्शन लॉ से बचाव: चड्ढा ने बहुत ही रणनीतिक तरीके से यह कदम उठाया है। चूँकि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद थे, और 7 सांसद (दो-तिहाई से अधिक) एक साथ अल

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