नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सियासी वार-पलटवार, अंबिकापुर में माहौल गरम
अंबिकापुर: देश में महिला आरक्षण विधेयक—'नारी शक्ति वंदन अधिनियम'—को लागू करने की समय-सीमा और इसके क्रियान्वयन को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। हाल ही में दोनों पार्टियों ने अलग-अलग प्रेसवार्ता कर एक-दूसरे पर महिलाओं के हितों के साथ 'विश्वासघात' करने का आरोप लगाया है।
भाजपा का हमला: "विपक्ष ने आरक्षण की राह में अड़चनें पैदा कीं"
भाजपा कार्यालय 'संकल्प भवन' में आयोजित प्रेसवार्ता में जिला पंचायत सदस्य दिव्या सिंह सिसोदिया और जिला महामंत्री अरुणा सिंह ने कांग्रेस और इण्डी गठबंधन को घेरा।
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मुख्य आरोप: भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में लाया गया यह विधेयक महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% प्रतिनिधित्व देने के लिए था, लेकिन विपक्ष ने परिसीमन, धर्म आधारित आरक्षण और क्षेत्रीय विवाद जैसे मुद्दे उठाकर इसे बाधित किया।
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विकास का दावा: दिव्या सिंह सिसोदिया ने पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि भाजपा ने ही पंचायतों में 50% महिला आरक्षण लागू किया था। उन्होंने तर्क दिया कि जनसंख्या के अनुपात में सही प्रतिनिधित्व के लिए परिसीमन आवश्यक है।
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प्रतिबद्धता: महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि भाजपा महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य की योजनाओं को बूथ स्तर तक ले जाएगी और विपक्ष की 'महिला विरोधी नीतियों' को जनता के सामने उजागर करेगी।
कांग्रेस का पलटवार: "आरक्षण को 2034 तक टालना राजनीतिक चाल"
दूसरी ओर, 'राजीव भवन' में पूर्व विधायक अंबिका सिंहदेव ने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज करते हुए केंद्र सरकार पर भ्रामक प्रचार का आरोप लगाया।
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तत्काल मांग: कांग्रेस का तर्क है कि महिला आरक्षण विधेयक सितंबर 2023 में कांग्रेस के सहयोग से संसद में पारित हुआ था। अंबिका सिंहदेव ने कहा, "यदि केंद्र सरकार वास्तव में गंभीर है, तो उसे जनगणना और परिसीमन के नाम पर इसे 2034 तक टालने के बजाय वर्तमान 543 सीटों में से 181 सीटें महिलाओं के लिए तुरंत आरक्षित कर देनी चाहिए।"
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आरोप: कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को केवल राजनीतिक लाभ के लिए परिसीमन से जोड़ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि स्थानीय निकायों में आरक्षण देने की शुरुआत कांग्रेस ने ही की थी।
महिला सुरक्षा पर चिंता: "अंबिकापुर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था"
आरक्षण के मुद्दे के साथ ही प्रेस वार्ता के दौरान महिलाओं की सुरक्षा का प्रश्न भी प्रमुखता से उठा। महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष सीमा सोनी ने प्रदेश और विशेषकर सरगुजा में महिला अपराधों में हुई वृद्धि पर चिंता जताई।
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प्रमुख समस्याएं:
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शहर में पुलिस गश्त का अभाव और पर्याप्त रोशनी की कमी।
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नशीले पदार्थों के कारोबार पर नियंत्रण न होना।
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हाल ही में अंबिकापुर में हुई एक महिला की हत्या के बाद पुलिस की लचर कार्यप्रणाली।
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कांग्रेस ने महिला अपराधों के विरोध में एक हस्ताक्षर अभियान चलाने की भी घोषणा की और आम जनता से इसमें बढ़-चढ़कर भागीदारी करने की अपील की।

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