ईरान में 3500 मौतों के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री ने युद्ध को बताया दुनिया के लिए उपहार
वॉशिंगटन। अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध में अब तक 3500 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, लेकिन इस मानवीय क्षति के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ का एक चौंकाने वाला बयान सामने आया है। हेगसेथ ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई को दुनिया के लिए एक वरदान और उपहार करार दिया है। उनका तर्क है कि यह युद्ध वास्तव में वैश्विक सुरक्षा के लिए ईरान के परमाणु खतरे को जड़ से समाप्त करने की एक अनिवार्य प्रक्रिया है, जिससे अंततः पूरी दुनिया का भला होगा।
रक्षा मंत्री ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ ही हफ्तों में अमेरिकी सेना ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का एकमात्र लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर पाए। इसके लिए ओमान की खाड़ी से लेकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र तक अमेरिकी नौसेना ने अभेद्य घेराबंदी कर दी है। ईरान की ओर आने-जाने वाले संदिग्ध जहाजों को सख्ती से मोड़ा जा रहा है। अब तक केवल 34 गैर-ईरानी जहाजों को ही इस क्षेत्र से गुजरने की अनुमति मिली है। हेगसेथ ने यह भी संकेत दिया कि जल्द ही एक और विमानवाहक पोत इस सैन्य अभियान में शामिल होकर अमेरिकी पकड़ को और मजबूत करेगा। युद्ध के मैदान से आ रही खबरों के बीच एयर फोर्स जनरल डैन केन ने सैन्य कड़े रुख की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि पिछले सप्ताह एक विशाल कंटेनर जहाज द्वारा चेतावनी की अनदेखी करने पर सेंटकॉम के आदेश पर उसके इंजन रूम पर सीधी फायरिंग की गई। जहाज को अक्षम करने के बाद अमेरिकी नौसैनिकों ने उस पर कब्जा कर लिया। हालांकि, अमेरिकी दावों के विपरीत लॉयड लिस्ट इंटेलिजेंस और विंडवर्ड जैसी फर्मों का डेटा बताता है कि ईरान का गुमनाम बेड़ा (शैडो फ्लीट) अब भी सक्रिय है। ईरानी टैंकर ट्रैकिंग डेटा के साथ छेड़छाड़ कर और पाकिस्तानी समुद्री सीमा का सहारा लेकर अमेरिकी घेराबंदी को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा मंत्री हेगसेथ ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (आईआरजीसी) की तुलना समुद्री लुटेरों से करते हुए कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाई गईं, तो उन्हें तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप के रुख को दोहराते हुए साफ किया कि अमेरिका किसी भी समझौते के लिए जल्दबाजी में नहीं है; वार्ता तभी संभव है जब ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह और स्थायी रूप से त्याग दे।

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