मलेरिया से जंग में बड़ा कदम, बच्चों के लिए आई नई दवा
विश्व मलेरिया दिवस: शिशुओं के लिए पहली खास दवा को WHO की मंजूरी, मासूमों की जान बचाना होगा आसान
मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का कहर हर साल लाखों परिवारों को उजाड़ देता है। विशेष रूप से मानसून के दौरान मलेरिया का प्रकोप एक बड़ी वैश्विक चुनौती बन जाता है। साल 2024 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया के 80 देशों में लगभग 28.2 करोड़ मलेरिया के मामले दर्ज किए गए, जिनमें से 6.10 लाख लोगों ने अपनी जान गंवाई। चिंताजनक बात यह है कि इन मौतों में 75% से अधिक संख्या 5 साल से कम उम्र के बच्चों की है।
नवजात शिशुओं के लिए ऐतिहासिक कदम
मलेरिया के खिलाफ जारी इस लंबी लड़ाई में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक युगांतरकारी घोषणा की है। शुक्रवार (24 अप्रैल) को शिशुओं के लिए विशेष रूप से तैयार की गई पहली दवा को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।
अब तक शिशुओं का इलाज वयस्कों वाली दवाओं से ही किया जाता था, जिससे खुराक (डोज) की मात्रा में चूक होने और साइड इफेक्ट्स का खतरा बना रहता था। विश्व मलेरिया दिवस (25 अप्रैल) के अवसर पर इसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
क्या है इस नई दवा की खासियत?
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सुरक्षित मिश्रण: 'आर्टेमेथर' और 'ल्यूमेफैंट्रिन' दवाओं का यह नया तालमेल 5 किलो से कम वजन वाले शिशुओं के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित है।
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प्री-क्वालिफिकेशन: इस दवा को WHO से 'प्री-क्वालिफिकेशन' प्राप्त हुआ है, जिसका अर्थ है कि यह गुणवत्ता और सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय पैमानों पर खरी उतरी है।
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सटीक इलाज: अब स्वास्थ्य कर्मियों को शिशुओं के लिए दवाओं को तोड़कर या अनुमान से खुराक देने की जरूरत नहीं होगी, जिससे नवजात बच्चों में मृत्यु दर कम होने की उम्मीद है।
डब्ल्यूएचओ प्रमुख का बयान
WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा कि सदियों से मलेरिया मासूम जिंदगियों को छीन रहा है, लेकिन अब आधुनिक टीके, नए डायग्नोस्टिक टेस्ट और प्रभावी दवाओं ने इस लड़ाई की दिशा बदल दी है। उन्होंने जोर दिया कि यदि राजनैतिक और आर्थिक इच्छाशक्ति बनी रही, तो हमारे जीवनकाल में ही मलेरिया का अंत संभव है।
जांच के लिए तीन नए टेस्ट को भी हरी झंडी
मलेरिया के बदलते स्वरूप और नए 'स्ट्रेन्स' की पहचान करने के लिए 14 अप्रैल 2026 को तीन नए रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) को भी मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों ने पाया था कि पुराने टेस्ट नए स्ट्रेन्स के विशिष्ट जीन को पहचानने में विफल हो रहे थे। नए टेस्ट अधिक भरोसेमंद हैं और बीमारी की सटीक पहचान करने में सक्षम हैं।
गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर जोखिम
मलेरिया न केवल बच्चों बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए भी अत्यंत घातक है।
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आंकड़ों के अनुसार, हर साल लगभग 10 हजार माताओं की मौत मलेरिया से होती है।
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इसकी वजह से लगभग 2 लाख बच्चे मृत पैदा होते हैं और 5.50 लाख बच्चे कुपोषित या कम वजन के साथ जन्म लेते हैं।

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