10 साल बाद इंसाफ: शिल्पू भदौरिया हत्याकांड में तीन को उम्रकैद
इंदौर: शिल्पू भदौरिया हत्याकांड में 10 साल बाद न्याय, तीन दोषियों को आजीवन कारावास
इंदौर। मध्य प्रदेश के चर्चित शिल्पू भदौरिया हत्याकांड में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है। ग्वालियर निवासी तीनों आरोपियों ने षड्यंत्र रचकर युवती की जान ली थी और इसे सुसाइड का रूप देने की कोशिश की थी, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर उनका झूठ टिक नहीं सका।
होटल की चौथी मंजिल से फेंकने से पहले घोंटा था गला
यह सनसनीखेज वारदात 7 अगस्त 2016 की है। इंदौर के प्रतिष्ठित होटल 'लेमन ट्री' में शिल्पू भदौरिया का शव संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ था। जांच में सामने आया कि दोषी आशुतोष जोहरे, शैलेंद्र सारस्वत और नीरज दंडोतिया ने शिल्पू को होटल बुलाया था। वहां युवती को शराब पिलाने के बाद आरोपियों ने पहले उसका गला घोंटा और फिर साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसे चौथी मंजिल से नीचे फेंक दिया।
झूठी निकली आत्महत्या की कहानी
शुरुआत में आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करते हुए इसे आत्महत्या करार दिया था। उनका दावा था कि विवाद के बाद शिल्पू ने खुद गैलरी से छलांग लगा दी। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उनकी इस कहानी की पोल खोल दी। रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि युवती की मृत्यु दम घुटने से हुई थी और उसके शरीर पर संघर्ष व चोटों के गहरे निशान थे।
वैज्ञानिक साक्ष्यों ने किया गुनाह साबित
पुलिस की गहन तफ्तीश और मेडिकल जांच में आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिले:
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घटनास्थल से कई आपत्तिजनक सामग्रियां मिलीं, जो हत्या की ओर इशारा कर रही थीं।
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आरोपियों की मेडिकल जांच में उनके नाखूनों से मृतका के डीएनए (खाल के अंश) प्राप्त हुए, जिससे यह सिद्ध हुआ कि हत्या से पहले वहां हाथापाई हुई थी।
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दोषियों ने साक्ष्य मिटाने का भी भरपूर प्रयास किया, लेकिन पुलिस की फॉरेंसिक टीम ने उनकी साजिश को नाकाम कर दिया।
अदालत का कड़ा फैसला
इंदौर कोर्ट ने तीनों दोषियों—आशुतोष सुधाकर जोहरे, शैलेंद्र पवन सारस्वत और नीरज हर्षकुमार दंडोतिया—को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और उन्हें नष्ट करने के जुर्म में तीनों को 9-9 साल की अतिरिक्त जेल और जुर्माने की सजा भी दी गई है।

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