Pappu Yadav Row: उषा ठाकुर के बयान पर बढ़ा सियासी घमासान
महिलाओं पर टिप्पणी को लेकर उषा ठाकुर का पप्पू यादव पर तीखा प्रहार, निर्दलीय सांसद को बताया 'नर पिशाच'
इंदौर/महू। पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव द्वारा महिलाओं को लेकर दिए गए एक विवादित बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, चौतरफा घिरने के बाद सांसद ने क्षमा याचना की है, लेकिन मध्य प्रदेश की पूर्व मंत्री और महू से भाजपा विधायक उषा ठाकुर ने इस पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने पप्पू यादव की आलोचना करते हुए उन्हें 'नर पिशाच' की संज्ञा दे डाली।
समाज के लिए खतरनाक मानसिकता: उषा ठाकुर
उषा ठाकुर ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में महिलाओं के प्रति इस तरह की अभद्र बयानबाजी समाज के लिए अत्यंत घातक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नारी शक्ति का अपमान किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यह पहली बार नहीं है जब उषा ठाकुर ने अपने तेवरों से सुर्खियां बटोरी हैं; इससे पहले वे अपनी ही पार्टी के नेताओं को भी अनुशासन के दायरे में रहने की नसीहत दे चुकी हैं।
जानें कौन हैं उषा ठाकुर?
उषा ठाकुर मध्य प्रदेश भाजपा का एक सशक्त चेहरा मानी जाती हैं। उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें:
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शिक्षा और पृष्ठभूमि: 3 फरवरी 1966 को इंदौर में जन्मीं उषा ठाकुर शैक्षणिक रूप से काफी समृद्ध हैं। उन्होंने एमए, एमएड और एमफिल की डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनके राजनीतिक जीवन की नींव राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्कारों से जुड़ी है।
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राजनीतिक सफर: उन्होंने अपने चुनावी सफर का आगाज़ साल 2003 में पहली जीत के साथ किया था। इसके बाद 2013 से वे निरंतर विधानसभा में जनता का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
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प्रशासनिक अनुभव: शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार (2020) में उन्हें कैबिनेट मंत्री के रूप में पर्यटन, संस्कृति और धार्मिक न्यास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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वर्तमान स्थिति: साल 2023 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने महू सीट से शानदार जीत दर्ज की। वर्तमान में वे विधायक के रूप में सक्रिय हैं, हालांकि मोहन यादव सरकार के मंत्रिमंडल में इस बार उन्हें स्थान नहीं मिला है।
उषा ठाकुर अपने बेबाक बयानों और हिंदुत्व के प्रति अपनी प्रखर विचारधारा के लिए जानी जाती हैं। पप्पू यादव पर उनके इस ताजा हमले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वे मर्यादा और संस्कारों के मुद्दे पर कोई समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं।

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