अलीराजपुर कांड: मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई पर महिला अफसर को धमकाने का आरोप
मध्य प्रदेश: रसूखदारों की मनमानी, अब मंत्री के भाई पर महिला अधिकारी को धमकाने का आरोप
अलीराजपुर|मध्य प्रदेश में इन दिनों राजनेताओं के परिजनों और करीबियों की दबंगई के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कभी किसी विधायक का बेटा आम नागरिकों को वाहन से कुचलने का प्रयास करता है, तो कभी किसी का भाई शासकीय अधिकारियों पर हमलावर हो जाता है। अक्सर ऐसे मामलों में हंगामा बढ़ने पर माफी मांगकर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की जाती है। ताजा मामला विधायक प्रीतम लोधी के बेटे के विवाद के बाद अब कैबिनेट मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई से जुड़ा है।
कार्यालय में हंगामा और अभद्रता
अलीराजपुर जिले के जनपद पंचायत कार्यालय में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब प्रदेश सरकार में मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई इंदर सिंह चौहान पर महिला मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को धमकाने और उन पर हमला करने के लिए दौड़ने का आरोप लगा। शिकायत के आधार पर पुलिस ने सुसंगत धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है।
विवाद की जड़: मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना
बताया जा रहा है कि यह विवाद मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के कुछ आवेदनों के अस्वीकार होने के कारण शुरू हुआ। जनपद पंचायत अध्यक्ष के पति इंदर सिंह चौहान इस निर्णय से आक्रोशित होकर कार्यालय पहुंचे और वहां पदस्थ CEO प्रिया ठाकुर से उलझ पड़े।
महिला अधिकारी का आरोप है कि:
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आरोपी ने उनके लिए मर्यादाहीन और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।
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उन्हें जान से मारने और "दांत तोड़कर जिंदा जमीन में गाड़ने" जैसी खौफनाक धमकियां दी गईं।
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विवाद के दौरान आरोपी उन्हें मारने के लिए आगे बढ़ा, जिससे वह कार्यालय के भीतर भी असुरक्षित महसूस कर रही हैं।
कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद आरोपी को हिरासत में लेकर न्यायालय में पेश किया, हालांकि उसे कुछ ही देर बाद जमानत मिल गई। इस पूरे घटनाक्रम पर मंत्री नागर सिंह चौहान ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनका अपने भाई के निजी कृत्यों से कोई वास्ता नहीं है और वे काफी समय से उनसे अलग रह रहे हैं।
रसूख का बढ़ता प्रभाव
यह पहली बार नहीं है जब इंदर सिंह चौहान का नाम ऐसे विवादों में आया है। प्रदेश में सत्ता के करीबियों द्वारा अधिकारियों को धमकाने और व्यवस्था को चुनौती देने की घटनाएं बढ़ रही हैं। विधायक प्रीतम लोधी के परिवार के बाद अब मंत्री के परिवार का नाम आने से सरकार की इच्छाशक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि ठोस कार्रवाई के अभाव में ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद नजर आ रहे हैं।

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