Betul Urea E-Token Verification: ई-टोकन सत्यापन में फंसी गन्ने की खाद, पर्याप्त स्टॉक के बावजूद भटक रहे किसान
Betul Urea E-Token Verification: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। किसानों को खाद लेने ई टोकन अनिवार्य करने से जिले में यूरिया का पर्याप्त भण्डार होने के बाजवूद किसान खाद के लिए परेशान हो रहे हैं। गन्ना की फसल लगाने वाले किसानों को भी ई टोकन डिमांड डालने के बाद बिना सत्यापन खाद नहीं मिल रही है। ई टोकन जनरेट करने में सर्वर की बाधा भी आ रही है जिससे किसान न तो सहकारी समिति से और ना ही प्रायवेट खाद दुकानदारों से खाद ले पा रहे हैं। गन्ना के लिए कुल निर्धारित मात्रा की एक तिहाई यूरिया और मक्का के लिए आधी खाद के ही टोकन बनने से किसानों असमंजस में है। प्रायवेट दुकानों में भी ई टोकन के बिना खाद नहीं मिलने से जिले में लगभग 25 हजार मीट्रिक टन यूरिया का स्टाक होने के बावजूद किसान यूरिया के लिए भटक रहे हैं।
एक अप्रैल से ई टोकन अनिवार्य
प्रदेश में सरकार द्वारा एक अप्रैल ई टोकन के माध्यम से ही सभी खाद बिक्री अनिवार्य कर दी है। किसानों को भारतीय कृषि अनुसंधान द्वारा सभी फसल के लिए निर्धारित मानक के अनुसार ही खाद दी जाएगी। किसानों को फार्मर आईडी बनाने के बाद अपने सभी खसरे और रकबे दर्ज करना होगा। उसके बाद उसके द्वारा बोई गई उपज के आधार पर ई टोकन जनरेट होगा। उसी के अनुसार किसान को खाद दी जाएगी। वर्तमान में किसानों को गन्ना और मक्का के लिए ई टोकन के माध्यम से खाद दी जा रही है।
गन्ना के लिए सत्यापन अनिवार्य
गन्ना के लिए प्रति हैक्टेयर 12 बोरी यूरिया निर्धारित की गई है जिसमें वर्तमान में 33 फीसदी यूरिया दी जा रही है। एक हैक्टेयर में गन्ना के लिए 4 बोरी यूरिया मिल रही है लेकिन इसके लिए ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी का सत्यापन अनिवार्य है। गन्ना के लिए ई टोकन की डिमांड करने पर किसान को 24 घंटे के बाद ई टोकन जनरेट होगा। किसान द्वारा दिए गए खसरा नंबर में गन्ना लगा है या नहीं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी इसका सत्यापन कर पोर्टल पर ऑनलाइन रिपोर्ट सब्मिट करेगा। रिपोर्ट में गन्ना की फसल होने पर किसान को खाद के लिए ई टोकन जारी होगा अन्यथा उसकी डिमांड कैंसिल कर दी जाएगी।
मक्का के लिए नहीं हो रहा अग्रिम उठाव
आईसीआर द्वारा मक्का की फसल के लिए प्रति हैक्टेयर 5 बोरी यूरिया ढाई बोरी डीएपी और एक बोरी एमओयू पोटाश की मात्रा निर्धारित की है। वर्तमान में किसानों को खरीफ फसलों मक्का, सोयाबीन आदि के लिए 50 प्रतिशत के ही ई टोकन जारी किए जा रहे हैं। बाकी 50 प्रतिशत बोवनी शुरू होने के दौरान किए जाएंगे। ऐसे में किसानों को अभी मक्का के लिए प्रति एकड़ एक बोरी यूरिया ही मिल रही है। पूर्व में किसान खरीफ फसलों के लिए आवश्यक खाद का अग्रिम उठाव कर लेता था लेकिन अभी प्रति एकड़ एक बोरी ही यूरिया मिल रही है जिससे किसान खाद को लेकर अमसंजस में है और पैनिक हो रहे हैं।
फार्मर आईडी में जुड़वाए सभी खसरे
कृषि विभाग के एडीए रामबीर सिंह राजपूत ने बताया कि जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है। किसानों को फार्मर आई डी बनाना और उसमें अपने सभी खसरे जुड़वाना अनिवार्य है। कुछ किसानों ने आईडी में अपने सभी खसरे नहीं जुड़वाए हैं जिससे उन्हें पूरी खाद नहीं मिल पा रही है। श्री राजपूत ने जिले के किसानों से अपील की है कि वे फार्मर आईडी में अपने नाम के सभी खसरे की जानकारी भरे तब ही उन्हें उनकी जमीन के हिसाब से खाद मिल पाएगी।

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