महिला आरक्षण पर सियासी घमासान, 27 अप्रैल को MP विधानसभा का विशेष सत्र
भोपाल: लोकसभा में 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 के गिर जाने के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति का केंद्र 'महिला आरक्षण' बन गया है। जहाँ मोहन सरकार ने विपक्ष को घेरने के लिए विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है, वहीं कांग्रेस ने भी सड़क पर उतरकर मोर्चा खोलने का मन बना लिया है।
1. भाजपा का दांव: विशेष सत्र और निंदा प्रस्ताव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने 27 अप्रैल को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आहूत किया है।
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रणनीति: भाजपा इस सत्र के माध्यम से यह संदेश देना चाहती है कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने संसद में महिलाओं के हक पर 'डाका' डाला है।
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निंदा प्रस्ताव: चर्चा है कि सरकार सदन में कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाएगी। इतना ही नहीं, इसे नगरीय निकायों तक ले जाने की योजना है।
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सीएम का प्रहार: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि नारी अपना अपमान नहीं भूलती और विपक्षी दलों ने अधिकारों का हनन किया है।
2. कांग्रेस का पलटवार: 'छलावा' के खिलाफ पैदल मार्च
विधानसभा सत्र से ठीक एक दिन पहले, यानी 26 अप्रैल को मध्य प्रदेश कांग्रेस भोपाल में एक विशाल पैदल मार्च निकालने जा रही है।
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मार्ग: यह मार्च माता मंदिर से शुरू होकर रोशनपुरा तक जाएगा।
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नेतृत्व: पीसीसी चीफ जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार इसकी अगुवाई करेंगे। इसमें मालवा-निमाड़ और मध्य भारत के कई जिलों के कार्यकर्ता जुटेंगे।
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प्रमुख मांग: कांग्रेस की मांग है कि परिसीमन और जनगणना का इंतजार किए बिना वर्तमान 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण तत्काल लागू किया जाए। कांग्रेस इसे भाजपा का राजनीतिक 'छलावा' और भ्रम फैलाने वाली रणनीति बता रही है।
क्यों मचा है यह सियासी बवाल? (विवाद की जड़)
इस टकराव के पीछे की मुख्य वजह 17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में हुई वोटिंग है:
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अधिनियम: सितंबर 2023 में पास हुआ 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' 16 अप्रैल 2026 को अधिसूचित (Notify) किया गया।
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नया प्रस्ताव: सरकार सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करना चाहती थी ताकि पुरुषों की सीटों में कटौती न हो।
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परिणाम: 131वें संविधान संशोधन विधेयक को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका।
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पक्ष में वोट: 298
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विपक्ष में वोट: 230
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जरूरत: 352+ वोटों की (54 वोटों की कमी से बिल गिर गया)।
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विधानसभा घेराव की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस केवल सड़क पर ही नहीं, बल्कि सदन के भीतर भी आक्रामक रहने वाली है। विधायक दल की ओर से बिना किसी शर्त (परिसीमन/जनगणना) के आरक्षण लागू करने का संकल्प पेश किया जा सकता है। साथ ही, विधानसभा घेराव जैसी रणनीति भी बनाई जा रही है।

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