सामूहिक दुष्कर्म केस: मददगार भी दोषी, कोर्ट ने बेल अपील खारिज की
जबलपुर। हाईकोर्ट ने नरसिंहपुर सामूहिक दुष्कर्म प्रकरण के आरोपी रामलाल ठाकुर की जमानत अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि जघन्य अपराधों में सक्रिय सहयोग देने वाला व्यक्ति भी मुख्य अपराधियों के समान ही दंड का पात्र होता है।
न्यायालय की तल्ख टिप्पणी
न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब कोई व्यक्ति साझा मंशा (Common Intention) के साथ किसी अपराध में शामिल होता है, तो उसकी जवाबदेही मुख्य आरोपियों के बराबर ही मानी जाएगी। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।
क्या है पूरा मामला?
पुलिस द्वारा प्रस्तुत विवरण के अनुसार, रामलाल ठाकुर पर एक नाबालिग आदिवासी युवती को अपनी गाड़ी में बैठाकर बकौरी के जंगल स्थित एक बंद स्टोन क्रेशर ले जाने का आरोप है। वहां पहले से मौजूद अन्नू, गणेश और ओमप्रकाश ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और इस घृणित कार्य का वीडियो भी बनाया।
दलीलें और साक्ष्य
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बचाव पक्ष: आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि रामलाल ने स्वयं दुष्कर्म नहीं किया, इसलिए उसे जमानत दी जाए। साथ ही प्राथमिकी में देरी और शिनाख्ती परेड न होने जैसे बिंदुओं को आधार बनाया गया।
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सरकारी पक्ष: शासकीय अधिवक्ता स्वाति जॉर्ज ने विरोध करते हुए बताया कि घटना के वीडियो में आरोपी की मौजूदगी स्पष्ट है। पीड़िता ने वीडियो साक्ष्य के जरिए ही आरोपी की पहचान की है।
न्यायिक फैसला
अदालत ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि गैंगरेप (धारा 376D) की व्याख्या के अनुसार, यह जरूरी नहीं कि हर आरोपी ने शारीरिक शोषण किया हो; यदि उसकी भूमिका अपराध को अंजाम देने में मददगार रही है, तो वह बराबर का दोषी है। वीडियो साक्ष्य को ठोस आधार मानते हुए और अपराध की वीभत्स प्रकृति को देखते हुए न्यायालय ने जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया।

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