Betul Political News: : पॉवरफुल गॉड फादर = ये तो होना ही था: हेमंत ने मंगल सिंह को भी दिलाया राज्यमंत्री का दर्जा
♦ मयूर भार्गव, बैतूल ♦
Betul Political News: यह सर्वमान्य सत्य है कि यदि राजनीति में आपका गॉड फादर शक्तिशाली तो आप ज्यादा दिन नैपथ्य में नहीं रह सकते। बैतूल जिले में भी इस समय ऐसे ही नजारे देखने को मिल रहे हैं। बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल जब से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने हैं उसके बाद से भाजपा के अनुषांगिक संगठनों और अब निगम-मंडल-आयोग की नियुक्तियों में भी बैतूल के भाजपा नेताओं पर पदों की बौछार हो रही है। घोड़ाडोंगरी के पूर्व विधायक और वर्तमान जिला पंचायत सदस्य मंगल सिंह धुर्वे पर हेमंत खण्डेलवाल का कितना स्नेह है यह भाजपा की राजनीति को करीब से और दूर से जानने वाले सभी अच्छे से जानते हैं। इस बार भी राज्य शासन द्वारा अनुसूचित जनजाति आयोग में मंगल सिंह धुर्वे को सदस्य बनाया गया है। यह नियुक्ति भी मंगल सिंह के प्रति हेमंत खण्डेलवाल के स्नेह और अटूट विश्वास का संकेत है। अब मंगल सिंह भी दर्जा राज्यमंत्री रहेंगे और उन्हें बतौर आयोग के सदस्य सभी शासकीय सुविधाएं और लाभ भी मिलेंगे।
मंगल सिंह धुर्वे को अपने शक्तिशाली गॉड फादर के चलते लगातार राजनैतिक ईनाम मिलते जा रहे हैं। 2015 में हेमंत खण्डेलवाल ने सबसे पहले मंगल ङ्क्षसह को बैतूल जिला पंचायत का अध्यक्ष बनवाया। उसके बाद जब 2016 में घोड़ाडोंगरी के विधायक सज्जन ङ्क्षसह उइके का असामयिक निधन हो गया तो हेमंत की गारंटी पर तात्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान ने घोड़ाडोंगरी विधानसभा के उपचुनाव की टिकट मंगल सिंह को दी और हेमंत खण्डेलवाल ने घोड़ाडोंगरी सीट फिर से भाजपा की झोली में डाली। इसके साथ ही मंगल सिंह विधायक बन गए। फिर 2018 में आए विधानसभा चुनाव में अप्रत्याशित तरीके से मंगल सिंह की टिकट कट गई और भाजपा ने गीता उइके को अपना उम्मीदवार बनाया। लेकिन गीता उइके कांग्रेस के प्रत्याशी ब्रम्हा भलावी से चुनाव हार गई।
2022 में हुए जिला पंचायत के चुनाव में हेमंत खण्डेलवाल की पर्दे के पीछे इच्छा थी कि हर हाल में मंगल ङ्क्षसह को दोबारा जिला पंचायत का अध्यक्ष बनाया जाए। लेकिन अचानक बदले राजनैतिक समीकरणों के चलते राजा पंवार जिला पंचायत बैतूल के अध्यक्ष बन गए। जिस दिन अध्यक्ष का चुनाव हुआ उसी दिन उपाध्यक्ष का चुनाव भी होता है। जब राजा पंवार अध्यक्ष बने तो सभी को लगा कि अब मंगल सिंह का उपाध्यक्ष बनना तय है लेकिन हेमंत खण्डेलवाल ने अपने विश्वसनीय और अति प्रिय मंगल सिंह के लिए कुछ अच्छा सोचकर रखा था। उसी दिन मंगल सिंह ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि जिला पंचायत का उपाध्यक्ष बनने के लिए मैंने खुद मना किया है क्योंकि मुझे पार्टी ने इतना कुछ दिया है कि अब नए लोगों को मौका मिलना चाहिए और फिर हेमंत के दूसरे विश्वासपात्र आदिवासी जिला पंचायत सदस्य हंसराज धुर्वे को जिला पंचायत का उपाध्यक्ष बना दिया गया। मंगल सिंह सिर्फ जिला पंचायत सदस्य बनकर रह गए।
2023 के विधानसभा चुनावों के पूर्व प्रशासनिक हलके में मंगल ङ्क्षसह को एमएलए जैसा ट्रीटमेंट मिलने लगा। चर्चा तो यह भी थी कि जिले के आला अफसरों को हिंट मिल गया है कि 2023 में मंगल सिंह ही घोड़ाडोंगरी विधानसभा से प्रत्याशी बनेंगे। लेकिन एक बार फिर मंगल सिंह की किस्मत ने साथ नहीं दिया और 2023 के चुनाव के पूर्व केंद्र सरकार लोकसभा में नारी शक्ति वंदन (महिला आरक्षण) बिल ले आई और तेजी से राजनैतिक घटनाक्रम बदला। गंगा उइके को महिला प्रत्याशी के तौर पर घोड़ाडोंगरी से भाजपा ने उम्मीदवार बना दिया। हालांकि गंगा उइके जिले की पांचों विधानसभाओं में सबसे कम वोट से जीतने वाली विधायक बनी।
इसके बाद मंगल सिंह फिर गांव की गलियों में खो गए लेकिन अपने गॉड फादर हेमंत खण्डेलवाल और भाजपा के प्रति उनकी निष्ठा में एक प्रतिशत का भी अंतर नहीं आया। 2023 में जब गंगा उइके घोड़ाडोंगरी से विधायक चुनी गई तो उसके बाद सोशल मीडिया पर घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र में मंगल और गंगा के समर्थकों में वार भी छिड़ा। इस दौरान मंगल सिंह की एक फेसबुक पोस्ट ने भी अच्छा खासा हंगामा मचाया था जिसमें मंगल सिंह ने लिखा था- समुद्र का पानी उतरता देख किनारों पर घर नहीं बनाया करते, क्योंकि समुद्र की लहरें लौटकर जरूर आती है.....
हेमंत ने मंगल सिंह जो अच्छा सोचकर रखा था उसका परिणाम 23 अप्रैल 2026 को सामने आया जब मध्यप्रदेश सरकार के अनुसूचित जनजाति आयोग में बतौर सदस्य मंगल सिंह की नियुक्ति हो गई। अब मंगल ङ्क्षसह को राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के साथ-साथ भोपाल में बंगला, शासकीय वाहन, वेतन, भत्ता, निज सहायक सहित अन्य सभी शासकीय सुविधाएं मिलेंगी और एक बार फिर मंगल सिंह मेन स्ट्रीम की पॉलीटिक्स में एक्टिव हो जाएंगे जिसके सुखद परिणाम 2028 में और देखने को मिलेंगे ऐसा राजनैतिक पंडितों का आंकलन है।

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