Betul Farmer Defaulter: कर्ज नहीं चुका पाने से 55 हजार से ज्यादा किसान हुए डिफाल्टर, अब खाद-बीज और ब्याज में होगा भारी नुकसान
Betul Farmer Defaulter: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिले में किसानों के हाल बेहाल है। एक ओर जहां वे समर्थन मूल्य पर अपनी गेहूं की उपज नहीं चुका पा रहे हैं वहीं आगामी सीजन के लिए पर्याप्त खाद भी उन्हें नहीं मिल रही है। अब उनके सामने एक नई समस्या आ गई है। जिला सहकारी बैंक से लिया गया कर्ज समय सीमा में अदा नहीं किए जाने से जिले के 55 हजार से ज्यादा किसान डिफाल्टर हो गए हैं। अब इन्हें न तो दोबारा ऋण मिल पाएगा और न ही खाद-बीज की सुविधा ही मिल सकेगी। इसके अलावा शून्य प्रतिशत ब्याज योजना का लाभ नहीं मिलेगा और तगड़ा ब्याज अदा करना होगा।
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक द्वारा जिले के 1 लाख, 33 हजार किसानों को 703 करोड़ रुपये का ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज योजना के तहत मुहैया कराया था। इस ऋण की अदायगी 28 मार्च 2026 तक करना था। इसके बाद ही किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज योजना का लाभ मिल पाता। ज्यादा से ज्यादा ऋण की वसूली के लिए जिला सहकारी बैंक द्वारा अभियान भी चलाया गया।
इसके लिए अधिकारियों को चारपहिया वाहन उपलबध कराए गए और पूरी टीम किसानों के घर-घर तक पहुंची थी। सभी के प्रयासों से ऋण अदायगी की अंतिम तिथि 28 मार्च तक 358 करोड़ रुपये की राशि ही जमा हो सकी। यह राशि 77500 किसानों द्वारा जमा करवाई गई है। इस तरह जिले के 55 हजार से ज्यादा किसान अब डिफाल्टर श्रेणी में आ गए हैं। इससे इन किसानों को कई तरह से नुकसान उठाना होगा।
अब भरना होगा तगड़ा ब्याज भी
सबसे बड़ा नुकसान किसानों को यह होगा कि अब उन्हें ब्याज भी अदा करना होगा। 28 मार्च तक ऋण अदा करने पर उन्हें ब्याज के रूप में एक पैसा भी नहीं देना होता। ऐसा नहीं होने पर अब उन्हें जिस तारीख से ऋण लिया है, उस तारीख से 28 मार्च तक 7 प्रतिशत और 28 मार्च के बाद 12 प्रतिशत की राशि ब्याज के रूप में अदा करना होगा। इससे उन्हें खासी चपत लगेगी।
नहीं मिल सकेगा खाद और बीज
इतना ही नहीं अब इन डिफाल्टर किसानों को नया ऋण भी नहीं मिल सकेगा। इसके अलावा समितियों के जरिए मिलने वाली खाद, बीज और कीटनाशक की सुविधा भी नहीं मिल सकेगी। इससे यह सब उन्हें बाजार से नकद में और ऊंचे दाम में खरीदने को मजबूर होना पड़ेगा।
फसल बेची तो सीधे कट जाएगी राशि
डिफाल्टर हुए किसानों के लिए एक बड़ा नुकसान यह भी होगा कि वे अपनी कोई भी फसल समर्थन मूल्य पर या भावांतर भाव योजना के तहत नहीं बेचना चाहेंगे। इसकी वजह यह है कि उन्हें भावांतर या समर्थन मूल्य के रूप में शासन से जो भी राशि प्राप्त होगी, वह ऋण और ब्याज के रूप में काट ली जाएगी। इससे किसान अपनी उपज को निजी व्यापारियों को ही बेचेंगे ताकि कम दाम ही सही, लेकिन पैसा सीधे उन्हें मिल सके।
कई दिक्कतों से जूझ रहे जिले के किसान
गौरतलब है कि जिले के किसान इन दिनों कई परेशानियों से जूझ रहे हैं। पंजीयन कराने के बावजूद किसान समर्थन मूल्य पर अपना गेहूं नहीं बेच पा रहे हैं। इसमें आए दिन उन्हें नई-नई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि समय पर गेहूं खरीदी शुरू हो जाती और वे इसे बेच सकते तो अपना ऋण अदा कर पाते। इसके अलावा ई-टोकन सिस्टम से खाद मिलने में भी परेशानी हो रही है। किसानों को जितनी खाद चाहिए और खुद सरकार ने जो मापदंड तय किए हैं, उसके अनुसार ही उन्हें खाद नहीं मिल रही है।

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