Betul Mandi Management Reform: डायरेक्ट IAS का दिखा असर: मंडी हुई खाली, किसानों को लम्बे समय बाद शेड में मिली राहत
Betul Mandi Management Reform: बैतूल(राष्ट्रीय जनादेश)। जिस कृषि उपज मंडी समिति बैतूल की बदहाल व्यवस्था प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल की फटकार के बाद और पूर्व कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के बार-बार दौरे के बाद भी नहीं सुधर रही थी उस मंडी की बेशर्म व्यवस्था को डायरेक्ट आईएएस कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के ईशारों ने ही सुधरने पर मजबूर कर दिया। नवागत कलेक्टर और जिले के पत्रकारों की पहली मुलाकात में पत्रकारों ने जब मंडी की अव्यवस्थाओं से कलेक्टर को अवगत कराया तो उन्होंने उसी समय कमिटमेंट कर लिया था कि जल्द ही मंडी की अव्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिलेगा जिसका परिणाम सामने नजर आ रहा है। मंडी परिसर और मंडी में बने शेडों में हमेशा से ही व्यापारियों के माल का कब्जा रहता था। जैसे ही कलेक्टर ने भारसाधक अधिकारी एसडीएम को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए तत्काल ही एसडीएम ने मंडी परिसर से माल उठाने के लिए व्यापारियों को 20 अप्रैल की डेडलाइन दे दी थी। साथ ही स्पष्ट कर दिया था कि 20 अप्रैल तक माल नहीं उठाया तो उनके लाइसेंस निरस्त कर दिए जाएंगे। इस निर्देश का असर 20 अप्रैल को देखने को मिला जहां लगभग 85 प्रतिशत माल व्यापारियों ने उठा लिया वहीं जिन दो व्यापारियों का माल रह गया था उन्हें मंगलवार को नीलामी में भाग नहीं लेने दिया गया। दोनों व्यापारियों को बुधवार शाम तक अंतिम अवसर दिया गया है। यह सब डायरेक्टर आईएएस की पदस्थापना और उनकी कार्यप्रणाली का ही असर है। वरना यह वही मंडी है जहां प्रभारी मंत्री और पूर्व कलेक्टर के निर्देश भार साधक अधिकारी सहित मंडी सचिव भी नहीं मानते थे।
मंडी में दिखा निर्देशों का असर
कृषि उपज मंडी परिसर से व्यापारियों को बोरे उठाने एसडीएम द्वारा दिए गए अल्टीमेटम का असर मंगलवार को साफ दिखाई दिया। मंडी परिसर लंबे समय बाद खाली नजर आया जिससे किसानों को मंडी परिसर में उपज खाली करने जगह भी मिल गई। हालांकि दो फर्मो का मक्का मंडी परिसर में लगा होने से मंडी सचिव द्वारा डन्हें बोली लगाने से रोक दिया। मंडी सचिव के इस निर्णय से सभी व्यापारी एकजुट हो गए थे। व्यापारियों ने मक्का उठाने एक दिन की मोहलत मांगी तथा कुछ देर बोली भी बंद कर दी थी। इसके बाद मंडी सचिव ने उन्हें बोली लगाने की अनुमति तो दे दी लेकिन दोनों फर्मो ने मक्का की खरीदी नहीं की। इनमें से एक फर्म ने पूरे मंडी में जगह-जगह रखे बोरे उठवाकर अपने गोडाउन के सामने रखवा दिए हैं। इस सीजन में पहली बार प्रशासन के अल्टीमेटम को मंडी व्यापारियों ने गंभीरता से लिया है जिससे मंगलवार को 18 हजार 282 बोरे की आवक होने के बावजूद मंडी खाली-खाली नजर आई।
लाइसेंस निरस्त करने की दी थी चेतावनी
कृषि उपज मंडी में मंडी प्रबंधन से लचर रवैये से व्यापारियों का बोलबाला था। मंडी शेड के साथ ही परिसर और यहां तक मार्ग तक में भी व्यापारियों के बोरे के चौक्ड़े लगे हुए थे। मंडी के भारसाधक अधिकारी और बैतूल एसडीएम ने पिछले दिनों व्यवस्था बनाने का भरसक प्रयास किया। मंडी परिसर से बोरे नहीं उठाने वाले लगभग दर्जन भर व्यापारियों पर जुर्माना भी लगाया गया, लेकिन कमजोर प्रशासनिक इच्छा शक्ति के चलते न तो व्यापारियों से जुर्माना वसूला गया और ना ही व्यापारियों पर किसी प्रकार का अंकुश लग पाया। इस बीच जिले में प्रशासनिक फेरबदल हुआ और डायरेक्ट आईएएस डॉ. संजय सौरभ सोनवणे बैतूल कलेक्टर नियुक्त हुए जिसका असर प्रशासनिक महकमे में साफ दिखाई देने लगा है। कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने भारसाधक अधिकारी डॉ. अभिजीत सिंह को मंडी में व्यवस्थाएं दुरूस्त करने के निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने 17 अप्रैल को मंडी में मक्का खरीदी करने वाले व्यापारियों की बैठक ली और स्पष्ट निर्देश दिए कि 20 अप्रैल शाम तक व्यापारी मंडी परिसर से अपने सभी बोरे उठवा ले अन्यथा लाइसेंस निरस्त करने के साथ ही दण्डात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।
अल्टीमेटम का दिखा असर
कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम द्वारा दिए गए निर्देश का असर भी दिखाई दिया। शुक्रवार और शनिवार को व्यापारियों ने मक्का की खरीदी नहीं की वहीं रविवार और सोमवार को अवकाश रहने से मंडी में नीलामी नहीं हुई। सभी व्यापारी मंडी परिसर से अपने बोरे उठवाने में लगे रहे। एक फर्म ने तो मंडी शेड और परिसर में रखे अपने बोरे उठावाकर मंडी परिसर में ही अपने गोडाउन के सामने जमा कर लिए। अधिकतर व्यापारियों ने अपने बोरे उठवा लिए फिर भी दो व्यापारियों के लगभग 10 से 12 हजार बोरे नहीं उठ पाए वहीं कुछ व्यापारियों के 100-200 बोरे ही बचे थे।
दो फर्मो को बोली लगाने से रोका
प्रशासन के कड़े रूख से मंडी सचिव भी बदले-बदले नजर आए। मंगलवार को मक्का की नीलामी शुरू होने पर मंडी सचिव सुरेश परते ने बोरे नहीं उठवाने वाली दोनों फर्मो को मक्का की नीलामी में भाग लेने से रोक दिया। हालांकि इसके विरोध में मंडी के अन्य व्यापारियों ने भी कुछ देर नीलामी रोक दी। बोरे नहीं उठाने वाले व्यापारियों ने एक दिन की मोहलत मांगी और बुधवार तक अपने सभी बोरे उठवाने का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्हें बोली लगाने की अनुमति दे दी लेकिन दोनों फर्मो ने पुराने बोरे उठाने नीलामी में भाग नहीं लिया।
शेड में मिली किसानों को जगह
कृषि उपज मंडी में लंबे समय बाद किसानों को मंडी शेड में अपनी उपज (विशेषकर मक्का) उतारने की जगह मिल पाई। मंगलवार को अधिकतर किसानों ने मंडी के शेड में मक्का उतारी जिससे उन्हें भीषण गर्मी में खुले आसमान के नीचे उपज उतारने से राहत मिली। मंडी में 18 हजार बोरे से अधिक आवक होने के बावजूद मंडी में पर्याप्त खाली जगह नजर आई। किसानों का कहना था कि यदि ऐसी ही सख्ती पूरे समय रहे तो मंडी में उपज उतारने लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इनका कहना...
मंडी परिसर से व्यापारियों ने काफी हद तक अपने बोरे उठवा लिए हैं। फिर भी लगभग 10 से 12 हजार बोरे बचे हैं जिन दो फर्मो के अधिक बोरे थे उन्हें मंगलवार को मक्का की नीलामी में बोली नहीं लगाने दी। उन्होंने एक दिन में सभी बोरे उठवाने का आश्वासन दिया है।
डॉ. अभिजीत सिंह, एसडीएम एवं भारसाधक अधिकारी, कृषि उपज मंडी, बैतूल

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