Wheat Procurement Issues MP: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। बैतूल सहित पूरे मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी नहीं होने से किसान बुरी तरह परेशान हैं। वजह यह है कि गेहूं खरीदी में रोड़ा बनने के लिए आए दिन नए-नए पेंच सामने आ रहे हैं, दूसरी ओर स्लॉट बुक करने और गेहूं खरीदी की आखरी तारीख करीब आती जा रही है। इससे किसान बेहद चिंतित और परेशान हैं। इसी कड़ी में अब सरकार की एक और कारगुजारी सामने आई है। जिले और प्रदेश के बड़े हिस्से को सैटेलाइट ने अकृषि भूमि के रूप में दिखा दिया है। जिससे कि इन क्षेत्रों के किसान स्लॉट बुक नहीं कर पा रहे हैं। वहीं जिनके स्लॉट बुक हो गए हैं, उनकी उपज बेहद कम दर्शाई जा रही है। 

समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी कहने को तो 9 अप्रैल से ही शुरू कर दी गई थी, लेकिन शुरू से लेकर अभी तक आ रही नई-नई दिक्कतों के कारण अभी तक भी गेहूं खरीदी रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। सबसे पहले किसानों के सामने स्लॉट बुक नहीं होने की समस्या सामने आई। इसके बाद प्रदेश सरकार सैटेलाइट सर्वे का नया फंडा ले आई है। इस सैटेलाइट सर्वे ने अब किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है।

सैटेलाइट सर्वे में जिले की काफी जमीन ऐसी जमीन के रूप में दर्शा दी गई है जहां खेती नहीं की जा सकती। इसे अकृषि भूमि बता दी गई है। इसमें कहीं मकान बताए गए हैं तो कहीं पथरीली जमीन बता दी गई है। जिन-जिन क्षेत्रों में यह अकृषि भूमि दर्शाई गई है, वह पूरा डाटा स्विच करके रख दिया गया है। नतीजतन, इन किसानों के स्लॉट ही बुक नहीं हो पा रहे हैं, भले ही वे एक-दो एकड़ वाले छोटे किसान ही क्यों न हो। इन किसानों को असत्यापित बताए जाने से वे अपना गेहूं ही नहीं बेच पा रहे हैं। इस संबंध में शिकायतें मिलने पर जिले के अधिकारियों ने भोपाल चर्चा की तो उन्हें बताया गया कि अकृषि भूमि वाले डाटा की जांच की जा रही है और एक-दो दिन में इस समस्या का निराकरण कर दिया जाएगा। 

अभी भी बरकरार पहले की समस्याएं 

इस नई समस्या के अलावा पहले की जो समस्याएं थी, वे अभी भी बरकरार हैं। जिसके चलते किसान परेशान हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर आज ग्राम सोहागपुर, परतापुर, मलकापुर, रतनपुर, धनोरा, बैतूल बाजार के किसान कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर डॉ. सौरभ सोनवणे से अपनी समस्याएं बताईं। कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने खाद्य विभाग के अधिकारियों को इन समस्याओं का निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। 

किसानों ने कलेक्टर को बताई यह समस्याएं 

किसानों ने बताया कि गेहूं बिक्री के लिए स्लॉट बुकिंग में अत्यधिक समस्याएं आ रही हैं। सर्वर डाउन चल रहा है। सैटेलाइट के द्वारा फसल पंजीयन को असत्यापित कर दिया गया है वहीं कुछ किसानों को प्रतीक्षा में दिखाया जा रहा है। इससे वे समर्थन मूल्य पर अपना गेहूं नहीं बेच पा रहे हैं। इन हालातों में किसानों को अपनी फसल व्यापारियों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने इन समस्याओं के निराकरण के साथ-साथ बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं खरीदी के मानकों में छूट देने की मांग भी की। 

ज्यादा रकबे में दिखा रहा कम उपज 

किसानों ने बताया कि अभी छोटे किसानों के स्लॉट बुक किए जा रहे हैं, लेकिन उसमें भी कई खामियां सामने आ रही हैं। शासन ने प्रति हेक्टेयर जो उपज तय की है, उससे बेहद कम उपज पोर्टल पर दिखाई जा रही है। इससे किसान पूरी उपज भी नहीं बेच पा रहे हैं। कई किसान ऐसे हैं जिन्हें जिले से सत्यापित किया जा चुका है, लेकिन पोर्टल पर असत्यापित दिखा रहा है। अभी बड़े किसानों के तो स्लॉट ही बुक होना शुरू नहीं हुए हैं, जबकि स्लॉट बुक कराए जाने की आखरी तारीख 30 अप्रैल तक ही है। इससे उन्हें यह चिंता सता रही है कि कहीं वे अपनी उपज बेचने से वंचित न रह जाए। खरीदी समाप्ति की आखरी तारीख जैसे-जैसे करीब आती जा रही है, वैसे-वैसे उनकी चिंता भी बढ़ रही है। दूसरी ओर शासन और विभाग समस्याओं का निराकरण ही नहीं कर पा रहा है। 

जिले में गेहूं खरीदी की यह स्थिति 

जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं की बिक्री करने के लिए 18979 किसानों ने अपना पंजीयन कराया था। इनमें से अभी तक मात्र 4143 किसानों के ही स्लॉट बुक हो सके हैं। इनमें भी कई त्रुटियां बरकरार हैं। इसके अलावा महज 1700 किसान ही अभी तक गेहूं की बिक्री समर्थन मूल्य पर कर पाए हैं। अभी तक मात्र 56 हजार क्विंटल गेहूं ही जिले भर से खरीदा जा सका है। इस बार बाजार में गेहूं के भाव नरम रहने के कारण ज्यादा से ज्यादा किसान समर्थन मूल्य पर बेचना चाहते हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही इन परेशानियों के कारण वे इसमें सफल नहीं हो पा रहे हैं।