PM SVANidhi Scheme: जितने स्ट्रीट वेंडर नहीं, उससे ज्यादा बांट दिए लोन: पीएम स्वनिधि योजना में टार्गेट के दबाव में अपात्रों को भी लाभ
PM SVANidhi Scheme: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। ऐसा लगता नहीं कि सरकारों द्वारा किसी भी चीज का लक्ष्य तय करने के लिए जमीनी स्थिति देखी जाती है। रही सही कसर ऐसे अफसर पूरी कर देते हैं जिन्हें टार्गेट जल्द पूरा करके अव्वल आने और इनाम लेने की हसरत होती है। बैतूल जिले में पीएम स्वनिधि योजना भी इन्हीं सब का शिकार हो रही है। यही वजह है कि शहर और जिले में जितने स्ट्रीट वेंडर नहीं है, उससे कई गुना ज्यादा लोगों को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ दिया जा चुका है। इसके बाद भी अभी भी लाभ देना चालू ही है।
कोरोना काल के ठीक बाद सड़क किनारे अस्थाई दुकान लगा कर अपनी आजीविका चलाने वाले रेहड़ी-पटरी वालों को उनका काम दोबारा शुरू करने के लिए मदद करने 1 जून 2020 को पीएम स्वनिधि योजना शुरू की गई थी। इस योजना के तहत पहले 10 हजार रुपये दिए जाते थे, जो कि 15 हजार रुपये किए जा चुके हैं। योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा स्ट्रीट वेंडर्स आसानी से ले सके, इसके लिए इसकी प्रक्रिया बेहद आसान रखी गई है और बहुत ज्यादा दस्तावेजों या गारंटी की जरुरत नहीं पड़ती है। कोरोना काल के बाद आर्थिक तंगी से जूझ रहे स्ट्रीट वेंडर्स के लिए यह योजना सौगात भी साबित हुई। उन्हें आसानी से राशि मिल गई और इसके चलते वे अपना काम-धंधा दोबारा शुरू कर सके। समय रहते लोन की राशि अदा करने पर अब 25 और 50 हजार रुपये की राशि भी प्रदान की जाती है।
अब योजना का हो रहा है दुरूपयोग
शुरूआती दौर में तो पात्रों और जरुरतमंदों को योजना का लाभ मिला और इससे वे दोबारा अपने काम शुरू भी कर पाए, लेकिन अब योजना का दुरूपयोग भी होने लगा है। इसकी सबसे बड़ी वजह शासन द्वारा दिया जाने वाला लक्ष्य और वे अफसर हैं जिन्हें हर हाल में लक्ष्य पूरा करके स्वयं पुरस्कार प्राप्त करना है। यही वजह है कि अब पात्र लोग नहीं मिलने पर अपात्रों को भी योजना का लाभ देना पड़ रहा है। जिले को जितना लक्ष्य मिला है, उतने स्ट्रीट वेंडर ही जिले में नहीं है।
इतना मिला है 2027 तक के लिए लक्ष्य
बैतूल जिले को मार्च 2027 तक के लिए 37127 प्रकरणों का लक्ष्य मिला है। वहीं बैतूल नगर पालिका को 12428 प्रकरणों का लक्ष्य मिला है। इसके विपरीत जिले में अभी 36294 और बैतूल नगर पालिका से 11829 प्रकरण सबमिट किए जा चुके हैं। इनमें से जिले में 31899 और बैतूल शहर में 10844 प्रकरण स्वीकृत हो चुके हैं। इन प्रकरणों में से जिले में 31503 और बैतूल शहर में 10746 प्रकरणों में ऋण राशि वितरित की जा चुकी है।
15 हजार ऋण वाले इतने हितग्राही
इनमें से 15 हजार (पहले 10 हजार) रुपये वाले हितग्राही देखें तो जिले के लिए इनका 22728 का लक्ष्य मिला था। इनमें से 22490 प्रकरण प्रस्तुत किए जा चुके हैं और 20314 स्वीकृत होकर 20020 को ऋण वितरित हो चुका है। इसी तरह बैतूल शहर को 7880 का लक्ष्य मिला था, जिसके विरूद्ध 7280 प्रकरण प्रस्तुत किए जा चुके हैं। इनमें से 6889 स्वीकृत होकर 6831 को ऋण वितरित हो चुका है।
जिले में महज इतने ही हैं स्ट्रीट वेंडर
इसके विपरीत यदि हम जिले में स्ट्रीट वेंडर्स की संख्या देखें तो जिले को मिले लक्ष्य और ऋण वितरित किए गए मामलों से काफी कम हैं। बैतूल नपा के अधिकारियों के अनुसार करीब 3 साल पहले बैतूल शहर में सर्वे करवाया गया था। उस समय पूरे शहर भर में करीब 600 स्ट्रीट वेंडर ही पाए गए थे। अब इतने समय में यदि इनमें हुई बढ़ोतरी भी जोड़ लें तो दोगुने से ज्यादा इनकी संख्या नहीं हुई होगी। यदि जिले भर में इनकी तादाद देखें तो भी यह किसी भी हाल में 4-5 हजार से ज्यादा नहीं होगी।
फिर कहां से आ रहे इतने स्ट्रीट वेंडर
अब सवाल उठता है कि जब जिले में इतने स्ट्रीट वेंडर है ही नहीं तो फिर लोन लेने के लिए इतने वेंडर कहां से आ रहे हैं। इस बारे में जानकारों का मानना है कि शासन का दबाव लक्ष्य पूर्ति करने का रहता है। वहीं दूसरी ओर जिले के भी कुछ अधिकारी ज्यादा से ज्यादा प्रकरण बनाकर जिले को नंबर वन दिखाने के लिए भारी दबाव डालते हैं। इन दोनों ही हालातों में यदि कोई अपात्र भी आवेदन करता है तो उसे भी योजना का लाभ मिल जाता है। ज्यादा दस्तावेजों की जरुरत नहीं होने और प्रक्रिया बेहद आसान होने से स्ट्रीट वेंडर नहीं होने के बावजूद भी आसानी से योजना का लाभ मिल जाता है।
जिले में पीएम स्वनिधि योजना की स्थिति
| ब्यौरा | जिले की स्थिति | बैतूल शहर की स्थिति |
| लक्ष्य | 37127 | 12428 |
| केस सबमिट | 36294 | 11829 |
| स्वीकृत प्रकरण | 31899 | 10844 |
| ऋण वितरित | 31503 | 10746 |
| लक्ष्य का प्रतिशत | 85 | 86 |

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