Betul Water Crisis: गुदगांव/बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। गर्मी शुरू होने से काफी पहले से जिले के जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर द्वारा गर्मी में जल संकट से बचने के लिए कार्ययोजना बनाकर कार्य करने की हिदायतें दी जा रही थी। लेकिन, लगता है इन हिदायतों को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) और नगरीय निकायों ने गंभीरता से लिया ही नहीं। यही कारण है कि जिले के ग्रामीण अंचलों में पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। इसके चलते अब लोगों का सब्र भी जवाब देने लगा है। भैंसदेही की ग्राम पंचायत पिपरिया में पीएचई विभाग 2 महीने में भी समुचित व्यवस्था नहीं कर पाया। इससे परेशान होकर आज ग्रामीणों ने चक्काजाम कर डाला।

गर्मी शुरू होने से पहले से जिले के जनप्रतिनिधि और कलेक्टर विभिन्न बैठकों में पीएचई के अधिकारियों को निर्देशित कर रहे थे कि गर्मी के मौसम में लोगों को जल संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए समुचित कार्ययोजना बनाएं और उसे अमल में भी लाए। यदि पीएचई विभाग इन निर्देशों को जरा भी गंभीरता से लेता तो जल संकट इतना विकराल रूप धारण नहीं करता।

इसके विपरीत जिले में तो लापरवाही का आलम कुछ इस कदर है कि जिन छोटी-छोटी सी समस्याओं का बड़ी आसानी से निराकरण हो सकता है, उनका भी निराकरण नहीं किया गया। इसी के चलते जिले के कई गांवों में जल संकट विकराल रूप लेता जा रहा है। इसी के चलते शुक्रवार को जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों को पानी मांगने के लिए सड़क पर उतरते हुए खेड़ी-परतवाड़ा स्टेट हाईवे पर चक्काजाम कर डाला। 

दो माह से पानी के लिए परेशान ग्रामीण

भैंसदेही जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पिपरिया में पिछले दो माह से ग्रामीण पीने के पानी के लिए भारी परेशान हैं। स्थिति यह है कि वे कई किलोमीटर दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। अपनी इस समस्या की शिकायत ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत में भी की थी, लेकिन इसके बावजूद कोई हल नहीं निकाला गया।

खेतों से पानी लाने को हैं मजबूर  

गांव में पानी की व्यवस्था नहीं हो पाने से ग्रामवासी विभिन्न साधनों से खेतों से पानी लाने को मजबूर हैं। लोगों का अधिकांश समय पानी लाने की मशक्कत में ही चला जा रहा है। इससे वे अपने काम-धाम भी नहीं कर पा रहे हैं। यही कारण है कि वे बार-बार पानी की व्यवस्था करने की गुहार लगा रहे थे। इसके बावजूद उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। 

एक घंटे लगा रहा स्टेट हाईवे पर जाम

पेयजल की इस गंभीर स्थिति को देखते हुए ही ग्रामीणों ने शुक्रवार को चक्काजाम का आह्वान किया था। जिसके चलते खेड़ी परतवाड़ा रोड पूर्णत: बंद रहा। रोड पर लंबा जाम लग गया। ग्रामीणों के अनुसार करीब एक घंटे तक स्टेट हाईवे पर वाहनों की आवाजाही बंद रही। चक्काजाम की सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे तथा ग्रामीणों को आश्वासन दिया। इसके पश्चात चक्काजाम समाप्त किया गया। 

पंचायत-पीएचई पर सवालिया निशान

इस संबंध में ग्राम पंचायत पिपरिया के सचिव का कहना है कि मोटर जल जाने से नल-जल योजना सुचारु रूप से नहीं चल पा रही है। दो दिनों में समस्या का समाधान किया जाएगा। यहां सवाल यह उठता है कि यदि केवल मोटर जल जाने से यह समस्या हो रही थी तो सचिव ने इन 2 महीनों में मोटर सुधारने या बदलने की जहमत क्यों नहीं उठाई? वहीं पीएचई विभाग भी इतने दिनों तक क्या करता रहा? जबकि विभागीय अधिकारियों को कलेक्टर समेत जनप्रतिनिधि बार-बार निर्देश दे रहे थे कि कहीं भी जल संकट की स्थिति निर्मित न हो, इसके लिए समुचित व्यवस्थाएं की जाएं। विभाग की लापरवाही से अभी भी न जाने कितने गांव पानी होते हुए भी अव्यवस्था के चलते जल संकट से जूझ रहे होंगे। वहीं उन गांवों की हालत का भी अंदाजा लगाया जा सकता है जहां जल स्रोत ही सूख चुके हैं। 

बैतूल में बोर खनन कर किया जा रहा इंतजाम 

इधर बैतूल शहर में भी पानी की खासी किल्लत हो गई है। इसके चलते नगर पालिका द्वारा फिल्टर प्लांट के आसपास के बोर चिन्हित कर उनका पानी प्लांट तक पहुंचा रही है। हालांकि इन बोरों में पहले से मोटर फंसी होने जैसी समस्या सामने आ रही है। इसे देखते हुए अब नपा नए बोर भी करवा रही है। गुरुवार रात्रि में नपा ने माचना के किनारे एक बोर करवाया, जिसमें ढाई इंच पानी लग गया है। इसके अलावा बोर के लिए एक प्वाइंट और इसके पास ही मिला है, जहां भरपूर पानी है। हालांकि वहां आसपास किसान द्वारा सिंचाई कर दिए जाने से मशीन नहीं जा पाई। इसके चलते अब एक-दो दिन बाद वहां बोर खनन कराया जाएगा। पानी की टंकियों के पास भी प्वाइंट देखे जा रहे हैं।