सर्वर ठप पड़ने से गेहूं खरीदी प्रभावित, प्रशासन बना मूकदर्शक
जबलपुर | मध्य प्रदेश में गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हुए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन जबलपुर जिले में सरकारी दावे धरातल पर पूरी तरह खोखले नजर आ रहे हैं। तकनीकी खामियों और प्रशासनिक ढुलमुल रवैये के कारण पूरी खरीदी व्यवस्था पटरी से उतर गई है। आलम यह है कि अन्नदाता अपनी उपज बेचने के लिए खरीदी केंद्रों के चक्कर काट रहा है, लेकिन 'सिस्टम' उसका साथ नहीं दे रहा।
तकनीकी विफलता: 'स्लॉट बुकिंग' बनी किसानों की मुसीबत
जिले में गेहूं खरीदी की शुरुआत के साथ ही सरकारी पोर्टल और सर्वर ने जवाब दे दिया है। किसान पिछले 72 घंटों से स्लॉट बुक करने के लिए भटक रहे हैं, लेकिन हर बार स्क्रीन पर 'सर्वर एरर' का संदेश उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन को खरीदी की तारीखों का ज्ञान पहले से था, इसके बावजूद सर्वर की क्षमता न बढ़ाना एक बड़ी लापरवाही है। साइबर कैफे और ऑनलाइन केंद्रों पर सुबह से शाम तक कतारें लग रही हैं, लेकिन परिणाम शून्य है।
मजबूरी का फायदा उठा सकते हैं बिचौलिए
खरीदी प्रक्रिया में हो रही इस देरी ने किसानों के मन में गहरा डर पैदा कर दिया है। किसानों को आशंका है कि यदि समय रहते स्लॉट बुकिंग सुचारू नहीं हुई, तो सरकारी खरीदी की अंतिम तिथि निकल जाएगी। ऐसी स्थिति में उन्हें अपनी कड़ी मेहनत की फसल को निजी व्यापारियों के हाथों औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। केंद्रों पर जहाँ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की रौनक होनी चाहिए थी, वहाँ अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
आंदोलन की राह पर अन्नदाता
प्रशासनिक सुस्ती और तकनीकी बाधाओं से तंग आकर किसानों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। कई केंद्रों पर छोटे-छोटे समूहों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। किसान संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि अगले 24 घंटों के भीतर सर्वर की समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
किसानों की प्रमुख माँगें:
- स्लॉट बुकिंग के लिए सर्वर की क्षमता में तत्काल सुधार किया जाए।
- तकनीकी दिक्कतों के कारण हुए समय के नुकसान की भरपाई के लिए खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए।
- लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों और तकनीकी टीम पर कड़ी कार्रवाई हो।

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