लोकसभा विस्तार का फॉर्मूला: शाह ने समझाया पूरा गणित
नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान लोकसभा की भविष्य की तस्वीर अब साफ होने लगी है। गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में उन आशंकाओं को दूर किया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि परिसीमन के बाद दक्षिण भारतीय राज्यों की राजनीतिक ताकत कम हो जाएगी। शाह ने आंकड़ों के जरिए स्पष्ट किया कि सीटों की संख्या बढ़ने से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होगा।
कैसे पहुंचेंगे 816 के आंकड़े तक?
अमित शाह ने सदन में सीटों की वृद्धि का सरल गणित साझा किया। उन्होंने बताया कि '850' एक अनुमानित संख्या है, जबकि वास्तविक गणना 816 के आसपास रहने वाली है।
गणित इस प्रकार है:
वर्तमान में लोकसभा की 543 सीटें हैं।
प्रस्तावित परिसीमन के तहत सीटों में 50% की वृद्धि की संभावना है।
इस आधार पर कुल सीटें बढ़कर 816 हो जाएंगी।
जब इन 816 सीटों पर 33% महिला आरक्षण लागू होगा, तो महिलाओं की भागीदारी मौजूदा सदन की कुल संख्या के एक बड़े हिस्से के बराबर हो जाएगी।
दक्षिण भारत की चिंता और शाह का जवाब
विपक्ष, विशेषकर कांग्रेस का आरोप था कि परिसीमन उत्तर भारतीय राज्यों के पक्ष में झुका हुआ है क्योंकि वहां जनसंख्या वृद्धि अधिक रही है। इसके जवाब में गृह मंत्री ने दक्षिण के पांच राज्यों के आंकड़े पेश किए:
- सीटों में इजाफा: दक्षिण भारत की कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 होने का अनुमान है।
- प्रतिनिधित्व प्रतिशत: सदन में दक्षिण भारत का कुल प्रतिनिधित्व 23.76% से बढ़कर 23.87% हो जाएगा, जो कि वर्तमान से थोड़ा अधिक ही है।
- राज्यवार लाभ: तमिलनाडु को 20, आंध्र प्रदेश को 13, केरल को 10 और तेलंगाना को 9 अतिरिक्त सीटें मिलने की उम्मीद है।
संविधान में होंगे बड़े बदलाव
परिसीमन की इस विशाल प्रक्रिया को अमली जामा पहनाने के लिए संविधान के 7 प्रमुख अनुच्छेदों (55, 81, 82, 170, 330, 332 और 334-ए) में संशोधन का प्रस्ताव है। यह पूरी प्रक्रिया 2011 की जनगणना को आधार बनाकर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करेगी।

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