डिजिटल प्रशासन में जबलपुर अव्वल, सभी जिलों को छोड़ा पीछे
जबलपुर | मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में जबलपुर जिले ने एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता का लोहा मनवाया है। वर्ष 2026 की प्रथम तिमाही (जनवरी-मार्च) के आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर का ई-दक्ष केंद्र प्रशिक्षण प्रदान करने के मामले में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान पर रहा है। जिले ने तकनीकी और प्रशासनिक शिक्षा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करते हुए अन्य सभी जिलों को पीछे छोड़ दिया है।
तीन महीनों में प्रशिक्षण का 'महाकुंभ'
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान ने केवल तीन माह के भीतर 2644 शासकीय सेवकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाया है। जिला ई-गवर्नेंस प्रबंधक चित्रांशु त्रिपाठी की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम को वरिष्ठ प्रशिक्षक संदीप पाण्डेय और स्वाति जैन ने जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाया।
AI और साइबर सुरक्षा: भविष्य की तैयारी
इस बार के प्रशिक्षण सत्र की सबसे बड़ी विशेषता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सिक्योरिटी पर विशेष जोर देना रहा। सरकारी कामकाज को पेपरलेस और आधुनिक बनाने के लिए कर्मचारियों को कई महत्वपूर्ण विषयों का ज्ञान दिया गया:
- आधुनिक तकनीक: एआई टूल्स का उपयोग कर प्रभावी नोटशीट, शासकीय पत्र और पीपीटी तैयार करना।
- कानूनी एवं सुरक्षा ज्ञान: सूचना का अधिकार (RTI) 2005, साइबर अपराधों से बचाव और सेवात्तम प्रशिक्षण।
- डिजिटल पोर्टल्स: ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस, आई-गोट कर्मयोगी, स्पर्श पोर्टल, और जनगणना व [Aadhaar Redacted] पोर्टल जैसे तकनीकी प्लेटफॉर्म्स का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
शिक्षकों से लेकर पुलिस तक, हर विभाग ने सीखी तकनीक
इस वृहद अभियान में शासन के लगभग सभी प्रमुख विभागों की सक्रिय भागीदारी रही। जहाँ एक ओर स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों को शिक्षण में AI के उपयोग के गुर सिखाए गए, वहीं दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक कार्यालय, आईजी-डीआईजी कार्यालय, नगर निगम, और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के कर्मियों ने भी अपनी डिजिटल दक्षता बढ़ाई। इनके अलावा कोष एवं लेखा, लोक निर्माण विभाग और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी भी इस सत्र का हिस्सा बने।
पारदर्शिता और गति पर फोकस
प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यप्रणाली को पारदर्शी, तीव्र और नागरिक-अनुकूल बनाना है। ई-दक्ष केंद्र का लक्ष्य है कि जिले का हर छोटा-बड़ा कर्मचारी तकनीक के उपयोग में इतना सक्षम हो जाए कि फाइलों के निस्तारण में लगने वाला समय कम हो सके और जनता को मिलने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आए।

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