महिला आरक्षण कानून पर भड़के Jairam Ramesh, बोले- ‘यह भ्रमित करने वाला कदम’
Women Reservation News: कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि यह बेहद अजीब स्थिति है कि सितंबर 2023 में पारित कानून आज लागू हो गया, जबकि इसमें संशोधन पर चर्चा अभी जारी है और कल मतदान होना है. जयराम रमेश ने इस प्रक्रिया पर हैरानी जताते हुए पारदर्शिता और स्पष्टता की कमी का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार को पहले संशोधनों पर निर्णय लेना चाहिए था, उसके बाद ही कानून लागू किया जाना चाहिए था. विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है.
दरअसल, केंद्र सरकार ने 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को 16 अप्रैल 2026 से लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है, लेकिन इसके वास्तविक क्रियान्वयन को लेकर अब भी असमंजस बना हुआ है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब संसद में इसी कानून में संशोधन से जुड़े तीन विधेयकों पर बहस जारी है और उन पर मतदान होना बाकी है. कानून मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया कि संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे. गौरतलब है कि सितंबर 2023 में संसद ने इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण कानून के नाम से जाना जाता है. इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है.
क्या हैं प्रावधान
हालांकि, इस अधिनियम के लागू होने के बावजूद इसके तत्काल प्रभाव से लागू होने की संभावना नहीं है. आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मौजूदा लोकसभा या विधानसभा में महिला आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए जनगणना के बाद परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है. 2023 के कानून में स्पष्ट किया गया था कि यह आरक्षण 2027 की जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर ही लागू होगा, जिसके चलते इसका वास्तविक असर 2034 के बाद ही देखने को मिल सकता है. अब यह सवाल उठ रहा है कि जब कानून को लागू करने की अधिसूचना जारी हो चुकी है, तो फिर संशोधन विधेयकों की आवश्यकता क्यों पड़ी.
विपक्ष ने उठाया सवाल
विपक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाते हुए इसे असामान्य और भ्रम पैदा करने वाला बताया है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक ओर सरकार कानून को लागू कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी कानून में संशोधन के लिए बहस कर रही है, जिससे स्थिति और जटिल हो गई है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अधिसूचना जारी करना एक औपचारिक प्रक्रिया है, जिससे कानून को वैधानिक रूप से प्रभावी बनाया जाता है. लेकिन इसके प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं (जैसे जनगणना और परिसीमन) पूरी होना जरूरी है.

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