Wheat Registration Fraud Betul: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। खरीफ सीजन के दौरान जिले में फर्जी गिरदावरी से बड़ी संख्या में ज्वार के फर्जी पंजीयन करवाने की तरह अब न्यूनतम समर्थन मूल्य में गेहूं बेचने भी फर्जी गिरदावरी से पंजीयन करवाने की आशंका लग रही है। सरकार द्वारा पंजीयन करवाने वाले किसानों के खेत की सेटेलाइट इमेज से मिलान करवाया जा रहा है, जिसमें कुछ किसानों के पंजीयन असत्यापित किए जा रहे हैं। इन किसानों द्वारा गेहूं बेचने स्लॉट बुक करने पर उनके स्लॉट बुक नहीं हो रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार कुछ किसानों ने उसी जमीन पर सरसो का भी पंजीयन करवाया था और अब गेहूं बेचने भी पंजीयन करवा लिया है। वहीं गन्ना लगाने वाले कुछ किसानों ने भी फर्जी गिरदावरी करवाकर या कम रकबे में गेहूं की बोवनी कर अधिक रकबे का पंजीयन करवा लिया है। जिससे सेटेलाइट इमेज में वर्तमान में भी हरियाली नजर आ रही है। हालांकि गेहूं की बोवनी करने वाले कुछ वास्तविक किसानों को भी सेटेलाइट द्वारा असत्यापित कर दिया गया है, जिससे उनके स्लॉट बुक नहीं हो रहे है। साथ ही बड़े किसानों के भी स्लॉट बुक नहीं होने से जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है।

रबी विपणन वर्ष २०२६ में समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने जिले में १८ हजार ९७९ किसानों ने पंजीयन करवाया है। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 9 अप्रैल से शुरू की गई है। समर्थन मूल्य पर जिले में केन्द्रों पर खरीदी की जा रही है, लेकिन गेहूं खरीदी रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। अधिकतर केन्द्रों में सर्वर प्रॉब्लम होने के साथ ही सेटेलाइट सर्वे बाधा बन रही है वहीं शुरूआत में छोटे किसान से ही गेहूं खरीदी करने के निर्णय से भी बड़े किसानों के स्लॉट बुक नहीं हो रहे हैं।

सेटेलाइट सर्वे में असत्यापित होने से फर्जी पंजीयन की आशंका

जिले में गत वर्ष खरीफ सीजन में सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ज्वार खरीदी करने की घोषणा करने के बाद बड़ी संख्या में किसानों ने फर्जी गिरदावरी के आधार पर ज्वार बेचने पंजीयन करवा लिए थे। जिले में १६६९ किसानों ने पंजीयन करवाया था जब कलेक्टर द्वारा मौके पर जांच करवाई गई तो मात्र २५ पंजीयन ही सहीं निकले थे। इस बार गेहूं बेचने जिले में १८९६९ किसानों ने पंजीयन करवाए हैं। गेहूं बेचने पंजीयन करवाने वाले किसानों का कृषि विभाग द्वारा सेटेलाइज इमेज से सत्यापन करवाया जा रहा है। जिसमें कुछ किसानों के पंजीयन को सेटेलाइट से असत्यापित किया गया है। खबर है कि कुछ किसानों ने एक ही रकबे में सरसो बेचने भी पंजीयन करवाया है। वहीं इसी में गेहूं बेचने का भी पंजीयन करवा लिया है। जबकि दोनों ही फसल रबी सीजन में ही बोई जाती है। जिले में किसानों द्वारा बड़ी संख्या में गन्ना उगाया जा रहा है। इन किसानों द्वारा गेहूं की बोवनी काफी कम रकबे में की जाती है, लेकिन अधिक रकबे में गेहूं की बोवनी दिखाकर पंजीयन करवा लिया जाता है। सूत्रों के अनुसार इन खेतों में सेटेलाइट में अभी भी हरियाली नजर आ रही है, जिससे फर्जी पंजीयन की आशंका लग रही है।

समर्थन मूल्य में तीन सौ रुपए अधिक है दाम

वर्तमान में गेहूं के दाम ओपन मार्केंट में औसतम २३०० रुपए प्रति क्विंटल चल रहे है। जबकि समर्थन मूल्य में गेहूं के दाम २५८५ रुपए प्रति क्विंटल हैं वहीं ४० रुपए प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जा रहा है, जिससे किसानों को २६२५ रुपए प्रति क्विंटल के दाम मिल रहे हैं। पिछले सीजन में गेहूं के दाम २४०० से २५०० रुपए प्रति क्विंटल ही रहे, वहीं नए गेहूं की आवक के बाद तो गेहूं के औसत दाम २२ सौ रुपए प्रति क्विंटल तक आ गए थे। वर्तमान में भी गेहूं के औसत दाम २३०० रुपए प्रति क्विंटल है। ऐसे में संभावना है कि जिले में सक्रिय समर्थन मूल्य के विशेषज्ञों द्वारा गेहूं बेचने भी फर्जी पंजीयन करवा लिया हो ताकि मार्केट से २३०० रुपए क्विंटल का गेहूं खरीद कर २६२५ रुपए में बेचा जा सके। यदि गेहूं पंजीयन की विस्तृत जांच करवाई जाए तो बड़ा खुलासा हो सकता है।