TET Exam Importance MP: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर प्रदेश सरकार के लोक शिक्षण संचनालय एवं जनजातीय कार्य विभाग द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के संबंध में जारी आदेश के बाद प्रदेश भर में अध्यापकों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। 

अध्यापकों के भारी विरोध के चलते सरकार द्वारा भले ही सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार किया जा रहा हो, लेकिन इस संबंध में अध्यापकों द्वारा दिए जा रहे ज्ञापन को देखकर लग रहा है कि वास्तव में टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) तो अब जरूर होना ही चाहिये। जिन अध्यापकों को राजनैतिक संगठन और मप्र शासन में अंतर नहीं पता वे बच्चों को क्या शिक्षा दे रहे होंगे। यही कारण है कि ऐसे शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा अनिवार्य ही रहना चाहिये।

टीईटी को निरस्त करने प्रदेश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहा है। अध्यापकों द्वारा जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन भी दिए जा रहे हंै। इसी क्रम में बैतूल जिला मुख्यालय में भी अध्यापक/शिक्षक संयुक्त मोर्चा मप्र के लेटर पैड पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को जिले के अध्यापकों ने परीक्षा निरस्त करवाने ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में उन्होंने राजनैतिक पार्टी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को मध्यप्रदेश शासन भोपाल मप्र का प्रदेश अध्यक्ष संबोधित किया है। 

उक्त ज्ञापन में अध्यापक संगठनों के लगभग एक दर्जन अध्यापकों के नाम और सात अध्यापकों के हस्ताक्षर भी है। जब अध्यापकों को ही नहीं पता कि श्री खंडेलवाल मप्र शासन के नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं तो वे विद्यार्थियों को क्या शिक्षा देंगे, यह यक्ष प्रश्र है। उक्त ज्ञापन पढ़ने के बाद अहसास हुआ कि इसलिए जरूरी है टीईटी टेस्ट तो होना ही चाहिये।