Betul Fake Number Plate Challan: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। अभी तक ऐसे मामले तो सामने आते थे कि कार घर में खड़ी है और टोल प्लाजा पर खाते से टोल टैक्स कट गया। अब मोटर साइकिलों के मामले में भी ऐसा ही कुछ होने लगा है। एक मोटर साइकिल मौजूद तो भोपाल में थी, लेकिन बिना हेलमेट बाइक चलाने का चालान बैतूल में कट गया। इस पूरे मामले ने बैतूल पुलिस की सक्रियता पर भी प्रश्र चिन्ह लगा दिया है और यह भी साबित हो गया है कि पुलिस का ध्यान केवल चालान काट कर रुपये वसूलने पर ही होता है। 

मामला कुछ यूं है कि भोपाल के करोंद क्षेत्र निवासी अजय सक्सेना डाक विभाग में पोस्टमैन हैं। वे करोंद पोस्ट ऑफिस में पदस्थ हैं। विगत 10 अप्रैल को 12.11 बजे अपने मोबाइल पर आए मैसेज ने उन्हें खासा चौंका दिया। चौंकने की वजह यह थी कि वे और उनकी मोटर साइकिल भोपाल में ही थी, लेकिन बैतूल में चल रही वाहन चेकिंग के दौरान उनकी बाइक का बिना हेलमेट चलाने का चालान कट गया। उनकी समझ में यह नहीं आ रहा था कि न वे बैतूल गए और उनकी बाइक ही बैतूल ले जाई गई, फिर उनका चालान कैसे कट गया। 

बैतूल में थी उसी नंबर की दूसरी बाइक 

दरअसल, हुआ यह था कि उनकी मोटर साइकिल का जो नंबर है, उसी नंबर की प्लेट लगाकर किसी और के द्वारा यहां बैतूल में भी किसी के द्वारा बाइक चलाई जा रही थी। चेकिंग के दौरान पुलिसकर्मी ने जब बिना हेलमेट पाए जाने पर उसका चालान बनाया तो बाइक चलाने वाले ने चालान भर दिया। यह चालान पीओएस मशीन से जमा होते ही उसका मैसेज श्री सक्सेना के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर चला गया। 

फर्जी नंबर लगाने की क्या थी जरुरत

अब सवाल यह उठता है कि उक्त बाइक चालक को फर्जी नंबर प्लेट लगाने की आखिर जरुरत क्या पड़ी। यदि यह बाइक नियमानुसार होती तो अपने असली नंबर के साथ चलाई जाती, उस पर किसी और बाइक का नंबर लगा कर चलाने की जरुरत ही नहीं पड़ती। स्पष्ट है कि वह बाइक चोरी की भी हो सकती है। इस तरह दूसरी बाइक की नंबर प्लेट लगाकर चलाने और इससे कोई अपराध घटित करने पर असली बाइक मालिक दिक्कत में आ सकता है, क्योंकि गाड़ी तो उसी के नाम पर रजिस्टर्ड है। 

पुलिस ने क्यों नहीं देखें दस्तावेज 

इस पूरे मामले में बैतूल पुलिस की लापरवाही भी सामने आई है। यदि पुलिस केवल चालान वसूली पर ध्यान देने के बजाय बाइक चलाने वाले से बाइक के दस्तावेज भी मांगती तो वह निश्चित रूप से दस्तावेज नहीं दिखा पाता, बल्कि थोड़ी सी पूछताछ में ही सच्चाई उगल देता। लेकिन, पुलिस ने लापरवाही दिखाते हुए उससे केवल चालान वसूला और जाने दिया। 

अब बाइक चालक काट रहा चक्कर 

पुलिस की इस लापरवाही काा खामियाजा अब असली बाइक मालिक को भुगतना पड़ रहा है। उनकी बाइक के नंबर पर दूसरी बाइक चलने की जानकारी मिलते ही उन्हें डर सताने लगा कि कहीं किसी आपराधिक मामले में उन्हें फंसाया जा सकता है। लिहाजा, वे पहले भोपाल के निशातपुरा थाना पहुंचे। वहां पुलिस ने उन्हें उनके क्षेत्र का मामला न होना बताकर बैरंग लौटा दिया। इसके बाद वे बैतूल आए और यहां ट्रैफिक पुलिस से शिकायत की। अब ट्रैफिक पुलिस द्वारा उक्त बाइक चालक की तलाश की जा रही है। 

जीरो पर भी हो सकती थी कायमी 

इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। निशातपुरा पुलिस यदि चाहती तो वहीं पर जीरो पर मामला कायम कर डायरी बैतूल पुलिस को भेज सकती थी, लेकिन पुलिस ने ऐसी कोई जहमत नहीं उठाई। दिखावे के लिए पुलिस ने ई-एफआईआर सिस्टम भी लागू कर दिया है, जिसके जरिए देश भर में कहीं से भी ऑनलाइन रिपोर्ट की जा सकती है, लेकिन इन सभी की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। आम आदमी आज भी पहले की तरह ही परेशान हो रहा है।