Betul Water Crisis: भीषण जल संकट की आहट: सूखता माचना एनीकट, ट्यूबवेलों के सहारे टिकी शहर की प्यास
Betul Water Crisis: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। नगर पालिका परिषद की अदूरदर्शिता और समय रहते पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाने से भीषण जल संकट की आहट साफ सुनाई दे रही है। माचना एनीकट लगभग सूख चुका है। ऐसे में उसे भरने आसपास के ट्यूबवेलों से उसमें पानी भरा जा रहा है। इसी तरह हर वार्ड में भी 2-2 हैंडपंपों में एक एचपी की मोटर डाली जा रही है ताकि पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने पर इनसे लोग पानी ले सके। इसके अलावा बिजली भी नगर पालिका को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है।
इस साल नगर पालिका ने पेयजल आपूर्ति को सुचारू बनाए रखने को लेकर समय रहते जरा भी प्लानिंग नहीं की। नपा के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों द्वारा पूर्व में समय रहते समुचित कदम नहीं उठाए जाने से यह संकेत पूरी तरह मिल चुके हैं कि इस बार शहरवासियों को भीषण जल संकट का सामना करना पड़ेगा। हालांकि अब अधिकारियों ने व्यवस्था बनाना शुरू किया है, लेकिन अब स्थिति खासी बिगड़ चुकी है। नपा की अदूरदर्शिता का ही नतीजा है कि अप्रैल के महीने तक लबालब भरा रहने वाला माचना एनीकट इस साल अभी ही लगभग सूख चुका है।
ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि जून-जुलाई तक स्थिति कितनी विकराल हो जाएगी। इस वक्त उसमें दो से ढाई फीट पानी ही बचा है। जबकि नगर पालिका इसका उपयोग इमरजेंसी स्टॉक के रूप में करती थी। इसका मतलब है कि ताप्ती बैराज में पानी लेने में यदि कोई दिक्कत हो तो माचना एनीकट से पानी लेकर सप्लाई किया जाता था। अब इमरजेंसी स्टॉक ही खत्म हो जाएगा तो फिर ताप्ती से पानी लेने में कोई समस्या आती है तो निश्चित रूप से जल आपूर्ति पर भारी असर पड़ेगा।
ट्यूबवेलों से पहुंचा रहे हैं पानी
माचना एनीकट में इमरजेंसी स्टॉक बनाए रखने के लिए अब नपा द्वारा फिल्टर प्लांट के आसपास के ट्यूबवेलों में मोटर डालकर पानी एनीकट और फिल्टर प्लांट में पहुंचा रहे हैं। इसके अलावा टंकियों के पास के ट्यूबवेलों को भी जोड़ा जा रहा है। अभी तक 1 कुआं और 5 ट्यूबवेलों को जोड़ा जा चुका है वहीं 4 ट्यूबवेल और जोड़े जा रहे हैं। इसके अलावा ताप्ती से आने वाला पानी भी फिल्टर प्लांट का टैंक भर जाने पर माचना में पहुंचाया जा रहा है।
वार्डों में भी हैंडपंपों में लगा रहे मोटर
इसके अलावा वार्डों में स्थित हैंडपंपों में भी मोटर लगाई जा रही है। हर वार्ड में 2-2 हैंडपंप में मोटर लगाने का प्रयास किया जा रहा है ताकि जल आपूर्ति प्रभावित होने पर इन मोटर लगी होने से लोग आसानी से पानी ले सकेंगे। अभी तक नगर पालिका 33 मोटर लगा चुकी है। कई सालों बाद नगर पालिका को यह कदम उठाना पड़ रहा है। यह बात अलग है कि जल स्तर कम होने पर यह हैंडपंप भी कितने समय तक साथ दे पाएंगे। यही स्थिति उन ट्यूबवेलों में भी बनेगी, जिनसे फिल्टर प्लांट और एनीकेट में पानी लिया जा रहा है।
बिजली और मजदूर की भी समस्या
नगर पालिका को बिजली की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। सोमवार को ताप्ती बैराज क्षेत्र में मेंटेनेंस के लिए 4 घंटे का कहकर 6 घंटे तक कटौती की गई। इससे उस बीच पानी ही नहीं आ पाया। इससे शहर की जलापूर्ति पर असर पड़ा। इधर फिल्टर प्लांट में भी लो वोल्टेज की समस्या हो रही है। इसका खासा असर पड़ रहा है। इसे लेकर नगर पालिका अधिकारियों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों से पत्राचार भी किया है। इधर जल प्रदाय शाखा मजदूरों की कमी से भी जूझ रही है। फिलहाल शाखा में केवल 16 लेबर ही है। वर्तमान स्थितियों को देखते हुए यहां कम से कम 15 और मजदूरों की दरकार है। कम मजदूर होने से भी तुरंत समस्या का निराकरण नहीं हो पा रहा है।

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