Betul Mandi Mismanagement: बैतूल मंडी की बदहाली पर क्या नए कलेक्टर करेंगे सख्त कार्रवाई? बोरों से पटा परिसर, किसानों को परेशानी
Betul Mandi Mismanagement: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिला मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी में व्यवस्थाएं बदहाल और ध्वस्त हो चुकी हैं। यह व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। शुक्रवार को मंडी में अनाज की नीलामी के बाद शनिवार और रविवार को मंडी में अवकाश रहने के बावजूद मंडी परिसर व्यापारियों के बोरों से खचाखच भरा हुआ है। मंडी के शेडों के साथ ही परिसर और यहां तक कि वाहनों के आने-जाने के मार्ग पर भी व्यापारियों के बोरे रखे हुए हैं। जिससे किसानों को उपज खाली करने जगह ही नहीं मिल रही है। किसानों को जहां कहीं थोड़ी-बहुत जगह दिख रही है, वे वहीं उपज खाली कर रहे हैं, लेकिन इसके ऊपर से वाहन गुजरने से किसानों के अनाज की दुर्दशा हो रही है। जिले के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के व्यवस्था सुधारने में नाकाम रहने के बाद अब किसानों को नवागत कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे से उम्मीद है कि यदि मंडी की ओर उनकी नजरें इनायत हो जाए तो ही शायद व्यवस्था में सुधार हो सकता है।
कृषि उपज मंडी में हावी हैं व्यापारी
कृषि उपज मंडी की स्थापना वैसे तो किसानों की सुविधा के लिए की गई है ताकि किसान आसानी से मंडी में अपनी उपज बेच सके और उन्हें वाजिब दाम मिल सके। सरकार भी मंडी में किसानों की सुविधाओं के लिए तत्पर रहती है, लेकिन लगता है कि बैतूल कृषि उपज मंडी इसका अपवाद है। यहां किसानों की नहीं, मंडी में खरीदी करने वाले व्यापारियों की सुविधाओं का ध्यान रखा जाता है। किसानों को भले ही मंडी में उपज उतारने जगह न मिले, सुबह से दोपहर तक मंडी गेट से मुख्य सड़क तक किसानों के वाहनों से जाम लग जाएं, लेकिन मंडी से व्यापारियों को अपने बोरे अपनी मर्जी से उठाने की खुली छूट है। मंडी बोर्ड में स्पष्ट प्रावधान है कि मंडी में खरीदी करने वाले व्यापारियों को खरीदी के बाद 24 घंटे या अगले दिन नीलामी के पूर्व अपने सभी बोरे उठवाना है ताकि किसान अपनी उपज खाली कर सके। 24 घंटे में बोरे नहीं उठाने पर प्रति दिन प्रति बोरा 10 रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है। लेकिन, बैतूल मंडी में व्यापारी 8 से 10 दिन तक बोरे रखते हैं और उसके बाद भी जुर्माना नहीं लगाया जाता है।
दो दिन के अवकाश में भी नहीं उठे बोरे
कृषि उपज मंडी बैतूल में शुक्रवार को नीलामी होने के बाद शनिवार और रविवार को अवकाश रहने से अनाज की नीलामी नहीं हुई। मंडी में हुई नीलामी को रविवार शाम तक 48 घंटे से अधिक का समय बीत गया है। इसके बावजूद मंडी परिसर व्यापारियों के बोरे से खचाखच भरा हुआ है। मंडी के सभी शेडों के साथ ही शेडों के बाहर और सड़क तक भी व्यापारियों के बोरे रखे हुए हैं जो शुक्रवार या उसके पहले खरीदे गए अनाज के हैं।
अनाज की हो रही है दुर्दशा
मंडी परिसर व्यापारियों के बोरों से खचाखच भरा होने से किसानों को अनाज उतारने जगह ही नहीं मिल रही है। जहां थोड़ी-बहुत जगह मिलती है, किसान वहीं अनाज उतार लेता है, लेकिन अनाज के ऊपर से ट्रकों के गुजरने से अनाज की दुर्दशा हो रही है। मंडी में वर्तमान में प्रतिदिन औसतन 20 हजार क्विंटल तक की आवक हो रही है। ऐसे में मंडी परिसर में जगह नहीं होने से सोमवार सुबह उपज लेकर आने वाले वाहनों को गेट के बाहर लंबा इंतजार करना पड़ेगा। इससे सड़क पर जाम भी लगता रहता है। किसानों को नवागत कलेक्टर डॉ. सोनवणे से अपेक्षा है कि रविवार को बैतूल कलेक्टर का पदभार संभालने के बाद यदि वे सोमवार सुबह मंडी का निरीक्षण कर किसानों की परेशानियों को प्रत्यक्ष रूप से देखें तो शायद मंडी में व्यवस्था सुधर सकती है। अन्यथा किसान तो परेशान हो ही रहे हैं।

9 महीने बाद भी जॉइनिंग न मिलने पर शिक्षकों का आक्रोश
राजभवन पहुंचे विजय, 112 विधायकों के समर्थन का दावा
सरकार ने 51 डॉक्टरों को बर्खास्त कर भेजा सख्त संदेश
फिल्म ‘दादी की शादी’ को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
सुप्रीम कोर्ट ने कहा—यह मामला सबरीमाला से भी अधिक अहम