Astroturf Cleaning Waste: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। जिला मुख्यालय पर स्थित मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा एस्टोटर्फ की सफाई के नाम पर फिजूलखर्ची की जा रही है। यह एस्ट्रोटर्फ पूरी तरह से खराब हो चुका है और जल्द ही यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का सिंथेटिक ब्लू एस्ट्रोटर्फ लगाया जाना है। ऐसे में इस साफ-सफाई का कोई औचित्य नहीं है। 

वर्ष 2010 में हॉकी खिलाड़ियों को एस्ट्रोटर्फ की सुविधा मुहैया कराने के लिए करीब 6.50 करोड़ रुपये की लागत से यह स्टेडियम बनाया गया था। जानकारों के अनुसार एस्ट्रोटर्फ ज्यादा से ज्यादा 10 साल तक चलता है। यहां इसे लगाए हुए 16-17 साल हो चुके हैं। इसके चलते एस्ट्रोटर्फ की हालत बेहद दयनीय हो चुकी है। जगह-जगह से यहा बुरी तरह से उधड़ चुका है वहीं कई स्थानों पर तो काफी बड़े हिस्से से एस्ट्रोटर्फ ही गायब हो चुका है। इसके चलते इस पर खेलने वाले कई बच्चे चोटिल भी हो चुके हैं। इन सब समस्याओं को देखते हुए खिलाड़ियों की मांग पर विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस स्टेडियम के लिए 6.97 करोड़ रुपये स्वीकृत कराए हैं। इस राशि से स्टेडियम में सिंथेटिक ब्लू एस्ट्रोटर्फ लगाना है। यह काम भी जल्द ही चालू होने की उम्मीद है। 

सफाई पर बड़ी राशि होती है खर्च 

जानकारों का कहना है कि एस्ट्रोटर्फ की साफ-सफाई विशेष मशीनों से होती है। हर छह महीने में एक बार इसकी सफाई होती है। इस पर मोटी रकम खर्च होती है और एक बार की सफाई में एक लाख लीटर से ज्यादा पानी लगता है। सफाई करने वाली मशीनें बड़ी-बड़ी कंपनियों के पास ही होती है। यहां फिलहाल जो सफाई हो रही है वह एडवांस स्पोर्ट्स टेक्रॉलॉजी कंपनी द्वारा कराई जा रही है। अब जबकि यहां पर नया एस्ट्रोटर्फ लगना ही है, ऐसे में इसकी साफ-सफाई पर भारी-भरकम रकम खर्च करने का कोई औचित्य नहीं है।

भोपाल से होता है सफाई का टेंडर 

बताया जाता है कि प्रदेश में जितने भी एस्ट्रोटर्फ मैदान है, उन सभी की सफाई के लिए भोपाल से ही टेंडर होते हैं। इसमें चयनित कंपनी ही सभी दूर सफाई करवाती है। इसके बाद बिल भोपाल मुख्यालय पर ही लगाए जाते हैं और वहीं से भुगतान भी होता है। विभाग को भी बात की जानकारी है कि यहां जल्द ही नया एस्ट्रोटर्फ लगना है, इसके बावजूद सफाई कराई जा रही है। इसे लेकर यह भी आरोप लग रहे हैं कि ऐसा करके केवल कंपनी का भला किया जा रहा है।