Betul Underbridge Traffic Issue: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। अंडर ब्रिज की लंबाई बढ़ाने के लिए ट्रैफिक बंद करने से लोगों को हो रही परेशानी का मामला जब मीडिया में उछला तो जनप्रतिनिधि जागे और अब 21 अप्रैल से ट्रैफिक शुरू करने का दावा किया जा रहा है। पहले 18 मई से ट्रैफिक शुरू होना था। इधर इस मामले में एक और खुलासा हुआ है। कंपनी ने ट्रैफिक बंद किए जाने के लिए प्रशासन से अनुमति तक लेना जरुरी नहीं समझा। 

अंडर ब्रिज की लंबाई बढ़ाने के लिए विगत 3 अप्रैल से अंडर ब्रिज से ट्रैफिक बंद कर दिया गया है। इससे लोगों को 4 से 5 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा काटकर आवाजाही करना पड़ रहा है। इससे भीषण गर्मी में भारी परेशानी उठाना पड़ रहा है। यह मामला लगातार मीडिया की सुर्खियां बना हुआ है। मीडिया में यह मुद्दा लगातार छाने के बाद जिले के जनप्रतिनिधि जागे और उन्होंने जनहित के इस मुद्दे की सुध लेते हुए रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके एवं भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर रेलवे अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया तथा कार्य योजना में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है।

संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण 

रेलवे के कार्यकारी अभियंता मनोज पाटीदार, सहायक मंडल अभियंता सोनल बेसेकर एवं अन्य तकनीकी टीम ने संयुक्त रूप से स्थल का निरीक्षण कर वर्तमान परिस्थितियों का आकलन किया। इसके पश्चात लोगों की दैनिक आवश्यकताओं एवं यातायात दबाव को ध्यान में रखते हुए कार्य योजना को पुन: निर्धारित किया गया। 

अब 21 अप्रैल से शुरू होगा यातायात

संशोधित योजना के अनुसार, 21 अप्रैल 2026 से गंज अंडरब्रिज से दोपहिया एवं चार पहिया हल्के यात्री वाहनों का आवागमन प्रारंभ किया जाएगा। पहले की प्लानिंग में तारीख 18 मई तय थी। इससे लंबा फेरा लगाकर आवागमन करने को मजबूर लोगों को राहत मिलेगी तथा ओवरब्रिज पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव में भी कमी आएगी। भले ही 21 अप्रैल से आंशिक यातायात शुरू करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसकी संभावना कम ही लग रही है, क्योंकि प्रोजेक्ट बड़ा है। 

प्रशासन से नहीं ली गई अनुमति 

इस मामले में यह खुलासा हुआ है कि कंपनी द्वारा यातायात बंद करने से पहले नियमानुसार प्रशासन से अनुमति तक नहीं ली गई। रेलवे द्वारा अधिकारियों को केवल सूचना के तौर पर पत्र दिया गया और ट्रैफिक बंद करके काम चालू करवा दिया गया। कंपनी और रेलवे की इस मनमानी कार्यशैली से ही यह पूरी समस्या उत्पन्न हुई है। 

पहले होता है विकल्पों पर विचार

जिन मामलों में पूरे शहर की व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका रहती है उन मामलों में नियम से पहले रेलवे के अधिकारियों द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर विचार-विमर्श किया जाता है कि प्रस्तावित समयावधि में कोई विशेष अवसर या आयोजन तो नहीं है, सड़क बंद होने पर आवाजाही की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी? इसके बाद प्रशासन द्वारा सभी परिस्थितियों को देख कर ही अनुमति दी जाती है। यहां इस मामले को लेकर न तो कोई बैठक की गई और न ही अनुमति ली और न ही वैकल्पिक व्यवस्था ही की गई। 

तो नहीं आगे नहीं बढ़ाना पड़ता तारीख 

गौरतलब है कि पहले रेलवे ने 1 अप्रैल से ही रोड बंद करने का तय कर लिया था। जागरूक लोगों ने जब हनुमान जन्मोत्सव के आयोजन की जानकारी दी तब इसे 3 अप्रैल किया गया। यदि पहले रेलवे के अधिकारी प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर लेते तो पहले ही सारी स्थिति स्पष्ट हो जाती और यह नौबत नहीं आती। वहीं प्रशासन द्वारा पहले वैकल्पिक व्यवस्था भी करवाई जाती। 

प्रशासन के निर्देश को भी तवज्जो नहीं

अंडर ब्रिज बना रही कंपनी केईसी इंटरनेशनल लिमिटेड द्वारा प्रशासन के निर्देशों को भी हवा में उड़ाया जा रहा है। सोमवार को एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे थे और कंपनी को निर्देश दिए थे कि आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए, लेकिन कंपनी ने 2 दिन बाद तक भी कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है। जबकि अंडर ब्रिज के बगल वाली पुलिया से वैकल्पिक मार्ग बड़ी आसानी से बनाया जा सकता है, लेकिन ऐसा न करने से कंपनी की हठधर्मिता ही उजागर होती है।