Betul Underbridge Traffic Problem: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। अंडरब्रिज और तीसरी लाइन का काम कर रही केईसी कंपनी ने महज कुछ लाख रुपये बचाने के लिए पूरे शहर को भारी मुसीबत में डाल दिया है। यदि कंपनी द्वारा प्री-कॉस्ट टेक्नीक से यह अंडर ब्रिज बनाती तो डेढ़ महीने तक ट्रैफिक बंद करने की जगह मात्र 4 से 6 घंटे ही ट्रैफिक बंद करने की जरुरत पड़ती और लोगों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। इसके अलावा अभी भी वहां हल्के और मध्यम वाहन निकालने के लिए विकल्प मौजूद हैं, लेकिन इस विकल्प को अमली जामा पहनाने के बजाय कंपनी,  प्रशासनिक अफसर और जनप्रतिनिधि हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। 

इटारसी से नागपुर तक बिछ रही तीसरी लाइन के लिए बैतूल के गंज क्षेत्र में अंडर ब्रिज की लंबाई बढ़ाई जा रही है। इस कार्य के लिए अंडर ब्रिज से सड़क यातायात 3 अप्रैल से पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अब यहां से वाहन तो दूर पैदल भी नहीं जा सकते। इसके चलते लोगों को 3 से 4 किलोमीटर का अतिरिक्त फेरा काटना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर वाहनों के भारी बोझ से वर्षों पुराना सदर ओवर ब्रिज हाफ रहा है। इधर लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि कंपनी, प्रशासनिक अफसर और जनप्रतिनिधि चाहते तो लोगों को इस परेशानी से बड़ी आसानी से बचा सकते थे और अभी भी बचा सकते हैं। 

दो तरह से बनाए जाते हैं अंडर ब्रिज 

दरअसल, अंडर ब्रिज दो तरह से बनाए जाते हैं। पहली तरह में जिस तरह अभी कंपनी बना रही है, उस तरह से बनाया जाता है। इसमें पूरा ढांचा मौके पर ही खड़ा किया जाता है। दूसरा तरीका यह होता है कि अंडर ब्रिज के बॉक्स दूसरी जगह तैयार किए जाते हैं। बॉक्स तैयार हो जाने पर इन्हें मौके पर लाकर फिट कर दिए जाते हैं। इसे प्री-कॉस्ट टेक्नीक कहा जाता है। इस तकनीक में इतने दिनों तक ट्रैफिक रोकने की जरुरत ही नहीं पड़ती बल्कि मात्र 4 से 6 घंटे में बॉक्स फिट करने का पूरा काम हो जाता है। 

मुख्य अंडर ब्रिज इसी तकनीक से बना

अभी जिस अंडर ब्रिज की लंबाई बढ़ाई जा रही है, वह मुख्य अंडर ब्रिज इसी प्री-कॉस्ट टेक्नीक से बनाया गया था। उसमें कुछ घंटों में ही बॉक्स फिट करने का काम पूरा हो गया था। रेलवे द्वारा अधिक ट्रैफिक वाले जिन स्थानों पर अंडर ब्रिज बनाए जाते हैं, वहां इसी तकनीक से अंडर ब्रिज बनाए जाते हैं ताकि सड़क यातायात पर बहुत ज्यादा असर न पड़े। 

कंपनी ने लोभ ने कराई फजीहत 

यह जरुर है कि प्री-कॉस्ट तकनीक से अंडर ब्रिज बनाने पर लागत थोड़ी ज्यादा आती है। यही कारण है कि लागत कम कर ज्यादा लाभ कमाने के केईसी कंपनी के लोभ ने पूरे शहर की फजीहत करा दी है। यदि कंपनी द्वारा प्री-कॉस्ट तकनीक से अंडर ब्रिज का निर्माण करती तो बॉक्स अलग से बनाए जा सकते थे और फिर बनने के बाद उन्हें यहां लाकर फिट करने में महज 4 से 6 घंटे में काम पूरा हो जाता। केवल इतने ही समय यहां पर रोड का ट्रैफिक रोकना पड़ता। इससे लोगों को जरा भी परेशानी नहीं उठानी पड़ती। 

अभी भी मौजूद है एक विकल्प 

इन सबके बावजूद अभी भी एक विकल्प अंडर ब्रिज के पास ही मौजूद है, लेकिन उसके उपयोग को लेकर कोई गंभीर नहीं है। दरअसल अंडर ब्रिज के पास ही एक नाले की पुलिया है। इस पुलिया से होकर यहां आसानी से रास्ता बनाया जा सकता है। कंपनी खुद 4 से 5 घंटों में यहां से रास्ता बनाकर दे सकती है, लेकिन अफसर और जनप्रतिनिधि कंपनी को ऐसा करने के लिए दबाव ही नहीं डाल पा रहे हैं। इटारसी में 3-3 अंडर ब्रिज बन रहे हैं और वहां इसी तरह नाले की पुलिया से अस्थाई रास्ता बनाकर ट्रैफिक निकाला जा रहा है। इसी तरह सोनाघाटी में भी इसी तरह की पुलिया से बाइक जैसे वाहन निकल रहे हैं। 

नाले में नहीं है बहुत ज्यादा बहाव 

यह नाला पुलिया से मात्र 200 से 300 मीटर पहले से शुरू होता है। इससे इसमें खास बहाव भी नहीं है। यदि कभी भारी बारिश ही हो गई तो कुछ समय के लिए रास्ता बंद किया जा सकता है। इस वैकल्पिक मार्ग से बाइक और कार जैसे वाहन आसानी से निकल सकते हैं। जिससे न तो लंबा फेरा काटना होगा और न ही लोगों को जान जोखिम में डालकर पैदल पटरी पार करना होगा। जनप्रतिनिधि और प्रशासन चाहे तो चंद घंटों में यह रास्ता शुरू करवा कर लोगों को परेशानी से निजात दिला सकते हैं, लेकिन ऐसी कोई इच्छा शक्ति ही नजर नहीं आ रही है। 

घूम-फिर कर आ गए अधिकारी 

इस समस्या का हल निकालने के लिए सोमवार को एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह और ट्रैफिक इंचार्ज गजेंद्र केन मौके पर भी पहुंचे थे, लेकिन कंपनी और रेलवे के आला अफसरों से बात कर उनसे व्यवस्था करने का कहने के बजाय मौके पर मौजूद मजदूरों और सुपरवाइजर से चर्चा कर वापस लौट आए। नतीजतन, मंगलवार शाम तक भी समस्या का कोई हल नहीं निकला और लोग परेशान होने को मजबूर हैं। 

एंबुलेंस पहुंची तब तक हो गया भारी नुकसान  

अंडर ब्रिज को बंद करने से लोगों को लंबी दूरी तो तय करना ही पड़ रहा है, आपातकालीन सेवाएं तक उन्हें समय पर नहीं मिल पा रही है। ऐसा ही एक नजारा आज देखने को मिला। रामनगर में नेशनल रेलवे मजदूर यूनियन द्वारा रामनगर गार्डन तैयार किया गया है। मंगलवार को रामनगर कॉलोनी के बाजू में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते इस आग ने भीषण रूप ले लिया। आग देख कर लोगों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन फायर ब्रिगेड को भी अंडर ब्रिज बंद होने से गेंदा चौक होकर सदर ओवर ब्रिज का चक्कर लगाते हुए मौके पर पहुंचना पड़ा।

फायर ब्रिगेड को लेट होते देख कर लोगों को खुद ही आग को काबू करने में जुटना पड़ा। उन्होंने सामूहिक प्रयास कर काफी हद तक आग पर काबू भी पाया। फायर ब्रिगेड जब तक पहुंची, तब तक पार्क के कई पौधे जलकर नष्ट हो चुके थे। लोगों का कहना है कि यह घटना रात में होती तो आग लोगों के घरों को भी चपेट में ले सकती थी। वहीं यदि किसी के घर में आग लग जाए और फायर ब्रिगेड देरी से पहुंचे तो सब कुछ खाक हो सकता है।