Sandipani School MP: एमपी के सांदीपनि विद्यालयों में एडमिशन में भेदभाव! प्राइवेट और RTE छात्रों को नहीं मिल रहा प्रवेश
Sandipani School MP: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। शासन द्वारा बच्चों को उत्कृष्ट शिक्षा देने के लिए हर ब्लॉक में एक-एक सांदीपनि विद्यालय (पहले सीएम राइज) तो शुरू किए गए हैं, लेकिन इनमें दाखिले के नाम पर खासा भेदभाव बरता जा रहा है। इन विद्यालयों में निजी स्कूलों में पढ़कर आने वाले बच्चों को दाखिला नहीं दिया जा रहा है। यहां तक कि खुद शासन द्वारा जिन बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढ़ाई करवाई जा रही है, उन्हें भी बड़ी कक्षाओं में दाखिला नहीं मिल पा रहा है। इससे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
सरकारी स्कूलों में भी प्राइवेट स्कूलों की तरह अच्छी शिक्षा और सभी सुविधाएं मिल सके, इसके लिए शासन ने वर्ष 2023 से सीएम राइज स्कूल शुरू किए थे। अब इन्हें सांदीपनि विद्यालय नाम दिया गया है। जिले में आमला, मुलताई, बैतूल बाजार (बैतूल ब्लॉक), घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, भैंसदेही, हिड़ली (आठनेर), हिड़ली (आठनेर), नसीराबाद (चिचोली), गुरवा पिपरिया (भीमपुर) सांदीपनि विद्यालय स्थित है। इन स्कूलों में 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित सभी प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों को मर्ज कर दिया गया है और वहां के बच्चों को यहीं पर प्रवेश दे दिया गया है। बच्चों को लाने-ले जाने के लिए बस सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। साथ ही स्कूलों में अन्य सभी सुविधाएं भी मुहैया कराई गई है। यही कारण है कि अब हर पालक यह चाहता है कि उनके बच्चे भी इस स्कूल में पढ़ सके।
निजी स्कूल के बच्चों को प्रवेश नहीं
शासन द्वारा सांदीपनि विद्यालयों पर करोड़ों रुपये खर्च तो किए जा रहे हैं, लेकिन इनका लाभ सभी बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। दरअसल, इन स्कूलों में उन बच्चों को दाखिला नहीं मिल रहा है जो कि 5वीं या 8वीं तक निजी स्कूलों में पढ़े हैं। ऐसे बच्चों के आवेदन सिरे से खारिज कर दिए जा रहे हैं और केवल सरकारी स्कूलों से पढ़े हुए बच्चों को ही एडमिशन दिया जा रहा है। यही कारण है कि जहां पर केवल 8वीं तक ही प्राइवेट स्कूल हैं, उन बच्चों को बाद में भी किसी निजी स्कूल की तलाश ही करना पड़ रहा है।
आरटीई वाले बच्चों की भी उपेक्षा
शासन द्वारा भी निजी स्कूलों में गरीब परिवार के बच्चों को आरटीई के तहत पढ़ाया जाता है। इन बच्चों की फीस खुद शासन द्वारा अदा की जाती है। कक्षा 5वीं या 8वीं तक यदि बच्चे आरटीई से पढ़े हैं और आगे की पढ़ाई सांदीपनि विद्यालयों में करना चाहते हैं तो उन्हें भी दाखिला नहीं मिल रहा है। यदि इन परिवारों की हैसियत इतनी होती कि वे प्राइवेट स्कूलों में पढ़वा सकते तो फिर आरटीई के तहत प्रवेश क्यों दिलवाते। ऐसे में इन बच्चों को तो कम से कम प्रवेश देना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
अपराध हो गया निजी स्कूल में पढ़ाना
शासन का यह भेदभाव भरा रवैया देख कर अब पालकों का कहना है कि उन्होंने क्या बेहतर भविष्य के लिए निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाकर कोई गुनाह कर दिया है? सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को भी प्रदेश शासन की किसी योजना का लाभ नहीं दिया जाता है। शासन को यह पक्षपातपूर्ण रवैया समाप्त करना चाहिए और कम से कम शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के साथ समानता पूर्ण व्यवहार कर सभी को सांदीपनि स्कूल में प्रवेश देना चाहिए।

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