boring mafia exploitation: आमला में छिंदवाड़ा के बोरिंग माफिया का आतंक: किसानों से मनमानी वसूली, बिल मांगने पर मिल रही धमकी
boring mafia exploitation: आमला (राष्ट्रीय जनादेश)। रबी की फसल और गन्ने की कटाई के बाद आमला ब्लॉक के खेतों में इन दिनों बोरिंग मशीनों की गड़गड़ाहट गूंज रही है, लेकिन इस गूंज के पीछे किसानों के शोषण की दर्दनाक दास्तां छिपी है। फरवरी से अप्रैल के बीच सिंचाई के लिए बोर खनन की मची मारामारी का फायदा छिंदवाड़ा जिले से आए बोरिंग मशीन मालिक और एजेंट जमकर उठा रहे हैं। किसानों का आरोप है कि ये एजेंट न केवल मनमाना पैसा वसूल रहे हैं, बल्कि विरोध करने पर काम अधूरा छोड़ने और जान से मारने की धमकी तक दे रहे हैं।
मजबूरी का खेल: बैन लगने के डर से किसान चुका रहे भारी कीमत
क्षेत्र के किसानों में इस बात का डर रहता है कि गर्मी बढ़ने पर प्रशासन बोर खनन पर प्रतिबंध लगा देगा। इसी डर का फायदा उठाकर एजेंटों ने लूट मचा रखी है। शुरुआत में कम रेट बताकर काम शुरू किया जाता है, लेकिन बीच में ही रेट बढ़ा दिए जाते हैं। मना करने पर मशीन खड़ी कर दी जाती है। क्षेत्र में सक्रिय अधिकांश एजेंट छिंदवाड़ा जिले के बताए जा रहे हैं, जिनके हौसले इतने बुलंद हैं कि वे किसानों के साथ सरेआम धोखाधड़ी कर रहे हैं।
केस 1: 1.20 लाख रुपए लिए, 850 की जगह 600 फीट ही किया बोर
ग्राम मालेगांव के किसान सुक्कू यादव ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि एजेंट ने उनसे 1 लाख 20 हजार रुपए एडवांस जमा करा लिए। तय हुआ था कि 850 फीट खनन होगा, लेकिन एजेंट ने 600 फीट पर ही मशीन बंद कर दी। जब सुक्कू ने विरोध किया और पक्का बिल मांगा, तो एजेंट विवाद करने लगे और बोर में पत्थर डाल दिए। सुक्कू यादव ने छिंदवाड़ा के पंकज यादव और भूरू यादव के खिलाफ बोरदेही थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
केस 2: 'लेट राड' के नाम पर वसूली, बिल मांगने पर किसान को धमकाया
धोखाधड़ी का दूसरा मामला ग्राम बामला का है। किसान दिलीप ने बताया कि बोरिंग संचालकों ने उनके हिसाब में 'लेट राड' के नाम पर जबरन 21,500 रुपए जोड़ दिए। जब उन्होंने पक्का बिल मांगा तो उन्हें धमकाया गया। वहीं, इसी गांव के कमलेश यादव ने बताया कि एजेंट ने लेट राड डालने के पैसे तो ले लिए, लेकिन पाइप (राड) डाली ही नहीं। यह सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका डाला जा रहा है।
केस 3: रेट में हेरफेर, जो तय हुआ उससे ज्यादा का बनाया बिल
ग्राम कलमेश्वरा के किसान संतोष यादव भी इन लुटेरे संचालकों का शिकार हुए हैं। संतोष ने बताया कि खनन शुरू होने से पहले जो रेट तय हुआ था, काम खत्म होने के बाद बिल में उससे कहीं ज्यादा राशि जोड़ दी गई। एजेंटों द्वारा किसानों का मानसिक और आर्थिक शोषण लगातार जारी है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
प्रशासनिक सुस्ती: शिकायत के एक हफ्ते बाद भी कार्यवाही शून्य
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित किसानों ने एक सप्ताह पहले ही एसडीएम आमला और बोरदेही थाने में लिखित आवेदन देकर कार्यवाही की मांग की थी। बावजूद इसके, अब तक किसी भी एजेंट या मशीन मालिक पर कोई ठोस एक्शन नहीं लिया गया है। कार्यवाही न होने से इन बाहरी एजेंटों के हौसले और ज्यादा बढ़ गए हैं।
इनका कहना है...
हमारे पास 5 किसानों ने बोरिंग मशीन संचालकों के खिलाफ आवेदन दिया है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है, जो भी दोषी होगा उस पर वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।
- राधेश्याम वट्टी, थाना प्रभारी, बोरदेही
जल्द ही क्षेत्र में सक्रिय सभी बोरिंग एजेंटों की बैठक ली जाएगी। किसानों से निर्धारित रेट से अधिक राशि वसूलने वालों और पक्का बिल न देने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही के निर्देश दिए जाएंगे।
- शैलेंद्र बड़ोनिया, एसडीएम, आमला

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