तमिलनाडु में तीन भाषा फॉर्मूले पर सियासी जंग, स्टालिन ने कहा- मेरे रहते नहीं होगा लागू
Tamil Nadu Vs Three-Language Formula: तमिलनाडु में जारी भाषा विवाद पिछले लंबे समय से छिड़ा हुआ है, जो कि खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सूबे के मुख्यमंत्री केंद्र के इस फैसले का शुरुआत से ही विरोध करते नजर आ रहे हैं. एक बार फिर उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक मैं यानी कि DMK सत्ता में है, तमिलनाडु में तीन-भाषा का फॉर्मूला लागू नहीं होगा. दरअसल केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत तीन भाषाओं के फॉर्मूले पर DMK ने केंद्र पर हिंदी थोपने का आरोप लगा रही है.मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि जब तक DMK सत्ता में है, तमिलनाडु में तीन-भाषा का फॉर्मूला लागू नहीं होगा.तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच इस महीने राज्य में होने वाले चुनावों से पहले, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत तीन-भाषा के फ़ॉर्मूले को लेकर जुबानी जंग चल रही है.स्टालिन ने फ़ॉर्मूले की आलोचना करते हुए कहा कि इसका मकसद तमिलनाडु के लोगों पर हिंदी थोपना है. इसके साथ यह भी कहा कि जब तक DMK सत्ता में है, वह इसे राज्य में लागू नहीं करेंगे.मुख्यमंत्री एमके स्टालिन का यह बयान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद सामने आया है. उन्होंने कहा कि इस चुनाव में हमारे जीत के चांस ज्यादा हैं. उनकी पार्टी इस बार सभी 234 सीटों पर जीत दर्ज करेगी.
NEP पर प्रधान और स्टालिन के बीच X पर जुबानी जंग
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि नई पॉलिसी भाषाई आजादी के लिए एक मैनिफेस्टो है. यह हिंदी को भाषाओं में से एक के तौर पर जरूरी नहीं बनाती है. कई भाषाओं को एक खतरे के तौर पर दिखाना गलत है. तमिल और भाषाएं सीखने से कमजोर नहीं होती है. यह तब और बेहतर होती है जब इसे बोलने वाले कई भाषाएं बोलने वाले कॉन्फिडेंस और भाषा के मामले में मजबूत होते हैं.हालांकि, स्टालिन ने प्रधान के इस दावे को ‘साफ़ तौर पर बेईमानी’ बताते हुए खारिज कर दिया कि हिंदी थोपी नहीं जा रही है. उन्होंने तर्क दिया कि जरूरी एजुकेशन फंडिंग को पॉलिसी के पालन से जोड़ने से पसंद का कोई भी असली हिस्सा खत्म हो जाता है.
क्या है पूरा विवाद?
केंद्र सरकार और तमिलनाडु राज्य सरकार के बीच काफी लंबे समय से हिंदी भाषा को लेकर विवाद चल रहा है. पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब तमिलनाडु सरकार ने दावा किया कि केंद्र ने नई शिक्षा नीति लागू न करने पर समग्र शिक्षा योजना के तहत मिलने वाला पैसा रोक लिया है. उस समय सीएम स्टालिन ने मोदी सरकार को पत्र लिखकर 2,152 करोड़ रुपये जारी करने की मांग भी की थी.पूरा मामला नई शिक्षा नीति से जुड़ा हुआ है. केंद्र का कहना है कि NEP युवाओं को रोजगार दिलाने में मदद करेगी. जबकि राज्य सरकार का कहना है कि केंद्र सरकार की तरफ से जबरदस्ती तमिलनाडु पर हिंदी भाषा थोपी जा रही है.
कैसा है इस बार का चुनाव
तमिलनाडु चुनाव को लेकर एमके स्टालिन काफी अस्वस्थ नजर आ रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी प्रदेश की सभी विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज करेगी. वहीं अगर बहुमत की बात की जाए तो तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है. राज्य में मतदान 23 अप्रैल को होगी और नतीजे 4 मई को जारी किए जाएंगे.

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