Gas Shortage Betul Impact: गैस संकट से भट्टी-सिगड़ी युग की वापसी, दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट
Gas Shortage Betul Impact: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। ईरान और ईजराइल-अमेरिका के बीच पिछले लगभग एक माह से चल रहे युद्ध का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की किल्लत के चलते जहां कई होटल-ढाबे, चाट-फुलकी के ठेले, चाय-नाश्ते की दुकाने बंद हो गई हैं, वहीं कई बंद होने की कगार पर है। गैस की किल्लत से एक बार फिर भट्टी और सिगड़ी युग की वापसी होने लगी है।
गैस सिलेण्डर नहीं मिलने से चाट-फुलकी आदि की दुकाने लगाने वाले व्यवसायी अब रोजी-रोटी बचाने सिगड़ी और भट्टी में खानपान की सामग्री बना रहे हैं। यूपी से आकर जिले में चाट-फुलकी का व्यवसाय करने वाले छोटे व्यापारियों द्वारा रोजगार बचाने सिगड़ी व्यवस्था की जा रही है। इन व्यावसायियों का कहना है कि यदि सिगड़ी में खानपान का सामान नहीं बनाएंगे तो उन्हें वापस अपने घर लौटना पड़ेगा।
ईरान-इजरायल युद्ध के चलते गैस सिलेंडर सप्लाई चक्र पूरी तरह प्रभावित हो गया है। गैस की कमी से कई उद्योग तक बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। वहीं चाट, पकोड़े, नाश्ते की दुकान लगाने वाले व्यवसायी सिगड़ी और भट्टी का सहारा ले रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में तो २५ दिन में रसोई गैस की बुकिंग हो जा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ४५ दिन बाद सिलेंडर की बुकिंग हो रही है। वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर मिलने का कोई ठिकाना ही नहीं है। ऐसे में जिला मुख्यालय स्थित चौपाटी में ५० से अधिक दुकानें बंद हो गई हैं। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में यूपी से आकर चाट-फुलकी का व्यवसाय करने वालों की बड़ी संख्या हैं। जिले के लगभग सभी बड़े गांव कस्बे में एक-दो परिवार निवास कर चाट-फुलकी की दुकानें लगाते हैं।
युद्ध के चलते गैस की किल्लत से इनका व्यवसाय बुरी तरह लड़खड़ा गया है। पाढर में मोनू चाट सेंटर के संचालक पर्वत सिंह कुशवाह ने बताया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने से उन्होंने लगभग १५०० रुपए खर्च कर लोहे के ड्रम में सिगड़ी बनवाई है। अब वे पत्नी आरती कुशवाह के साथ घर में ही सिगड़ी जलाकर फुलकी तैयार कर रहे हैं। उन्होंने बताया ऐसी सिगड़ी सिर्फ उन्होंने ही नहीं बल्कि लगभग सभी व्यवसायियों ने बनवाई है। सिगड़ी में जलाने के लिए आरा मशीन से जलाऊ लकड़ी के टुकड़े खरीद रहे हैं। आरा मशीन वालों ने भी जलाऊ लकड़ी के दाम बढ़ा दिए हैं, लेकिन रोजी-रोटी के लिए भीषण गर्मी में भट्टी और सिगड़ी में काम करना पड़ रहा है।
वैसे भी ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की बुकिंग ४५ दिन बाद हो रही है। बुकिंग करने के २-३ दिन बाद गैस सिलेंडर की सप्लाई होती है। जिससे उपभोक्ता को ४८ से ५० दिन बाद गैस सिलेंडर मिल रहा हैं। ४ लोगों के सामान्य परिवार में भी रसोई गैस सिलेंडर २५ से ३० दिन में खत्म हो जाता है। ऐसे में ग्रामीणों को १५ से २० दिन के लिए दूसरी व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई लोगों द्वारा सिगड़ी बनाई जा रही है। वहीं शादी सहित अन्य बड़े आयोजनों में अब भट्टी का इस्तेमाल होने लगा है। युद्ध के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में एक बार फिर सिगड़ी-चूल्हा और भट्टी युग की वापसी हो रही है।

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