हरीश रावत के ‘राजनीति अवकाश’ पर पार्टी में घमासान, हरक सिंह रावत का तंज
देहरादून: इन दिनों पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राजनीतिक कार्यक्रमों व मीडिया से दूरी बनाई हुए हैं. उनकी इस घोषणा के बाद से ही कांग्रेस पार्टी असहज है. ऐसे में कुछ लोग उनके राजनीति अवकाश को नाराजगी से जोड़कर देख रहे हैं. वहीं उनकी ही पार्टी के नेता उन पर तंजात्मक टिप्पणी करने से बाज नहीं आ रहे हैं.
पार्टी में एक बार फिर से गुटबाजी दिखाई दे रही है. हरीश रावत के करीबी पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल पहले ही इस बात को कह चुके कि हरीश रावत किसी ना किसी बात से नाराज हैं. वहीं उनके खेमे के माने जाने वाले धारचूला विधायक हरीश धामी ने चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हरक सिंह रावत के बयान को निंदनीय बताते हुए हरीश रावत के समर्थन में सामूहिक इस्तीफा देने की सोशल मीडिया में चेतावनी दे डाली. इन सबके बीच हरक सिंह रावत का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने पार्टी प्रदेश मुख्यालय में कहा कि मैं कभी भी दो-चार दिन आराम पर जाने के लिए विज्ञप्ति जारी नहीं करता हूं. लेकिन हर व्यक्ति की अपने काम करने की शैली अलग होती है. हम कभी इस बात का खुलासा नहीं करते हैं कि हमने 5-6 दिन के लिए व्रत ले लिया है.
कई बार उनके जीवन में ऐसा हुआ है कि जब कभी भी उन्होंने नॉनवेज खाना शुरू किया, दो-चार दिन खाने के बाद अगर किसी पशु के साथ हो रही हिंसा को सोशल मीडिया में देखता हूं तब उसके बाद मेरा मन नॉनवेज खाने का नहीं करता है. उसके बाद मन ही मन वह कसम खा लेते हैं कि वह कभी मांसाहार का सेवन नहीं करेंगे. पिछले दो-तीन साल उन्होंने नॉनवेज खाना छोड़ रखा था. उसके बाद एक बार फिर से उन्होंने नॉनवेज खाना शुरू किया, उन्हें फिर से वही हालात दिखने लगे, उसके बाद उन्होंने फिर से एक बार नॉनवेज छोड़ दिया.
उन्होंने इसकी विज्ञप्ति सोशल मीडिया पर कभी जारी नहीं की. लेकिन मीडिया के माध्यम से अब यह विज्ञप्ति भी जारी हो गई, कि मैंने मांसाहार छोड़ दिया है. उन्होंने कहा कि हरीश रावत उनके बड़े भाई के समान हैं, उनकी उम्र भी काफी हो गई है. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में बहुत मेहनत की है. आज उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर कोई इतनी मेहनत नहीं कर सकता है, जितना हरीश रावत करते हैं. उन्होंने कांग्रेस के विरुद्ध एक भी शब्द अभी तक नहीं बोला है. उनकी तरफ से अभी तक कांग्रेस की कोई आलोचना नहीं की गई है. हरक सिंह रावत का कहना है कि वह पहले से ही इस बात को कहते आए हैं कि अगर आयु बढ़ानी है तो अपने राजनीतिक जीवन काल में चुनाव लड़ते रहना चाहिए.

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