Betul Teacher Distribution: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। अन्य विभागों के कर्मचारियों की तरह शिक्षक भी शहर या उसके आसपास पदस्थ रहकर ही नौकरी करना चाहते हैं। यही वजह है कि जिले के जिन विकासखंडों में शहरी क्षेत्र हैं वहां तो बड़ी संख्या में शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन जहां पर शहरी क्षेत्र न होकर केवल ग्रामीण अंचल है, उन ब्लॉकों में शिक्षकों का खासा टोटा है। दूसरी ओर जिला मुख्यालय पर तो जैसे शिक्षकों की भरमार ही हो गई है। 

सरकार ने ग्रामीण अंचल के बच्चों को भी शिक्षा मुहैया कराने के लिए दूरदराज के गांवों तक में स्कूल खोल रखे हैं। इन स्कूलों में शिक्षक भी पदस्थ किए गए हैं, लेकिन अधिकांश शिक्षक या तो ऐसे स्कूलों से अपना तबादला करवा लेते हैं या फिर स्वयं को शहर में स्थित किसी दफ्तर में अटैच करवा लेते हैं। यही कारण है कि दूरदराज के ग्रामीण अंचलों में स्थित स्कूलों में एकाध शिक्षक को ही पूरा स्कूल चलाना और हर कक्षा के बच्चों को पढ़ाना होता है। दूसरी ओर शिक्षक शहर या शहर के आसपास के किसी स्कूल में ही नौकरी करना चाहते हैं। शहर में पदस्थापना होने से वे जहां परिवार को अच्छी सुविधाएं मुहैया करा सकते हैं वहीं बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में भी कोई दिक्कत नहीं होती। वहीं रोज-रोज के लंबे सफर से भी निजात मिल जाती है। यही कारण है कि जिले के शहरी क्षेत्र में बड़ी संख्या में शिक्षक पदस्थ हैं। दूसरी ओर ग्रामीण अंचलों में स्थित स्कूलों में इक्का-दुक्का शिक्षकों के भरोसे पूरे स्कूल है। 

बैतूल ब्लॉक में सबसे ज्यादा शिक्षक 

जिले में कक्षा 1 से 12 तक कुल 2624 स्कूल हैं, जिनमें से 2278 सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में सभी संवर्गों के कुल 8044 शिक्षक पदस्थ हैं। लेकिन, शिक्षकों की पदस्थापना पूरे जिले में मापदंडों या जरुरत के अनुसार एक समान नहीं है। बैतूल ब्लॉक में 285 स्कूल हैं, लेकिन यहां 1440 शिक्षक पदस्थ हैं। यह जिले में सबसे ज्यादा है। दूसरी ओर भीमपुर ब्लॉक में बैतूल से भी ज्यादा 309 स्कूल हैं। कायदे से देखा जाए तो यहां पर बैतूल से ज्यादा शिक्षक होने चाहिए, लेकिन वास्तविकता यह है कि यहां पर बैतूल से लगभग आधे मात्र 754 शिक्षक ही पदस्थ हैं। आदिवासी बहुल और दूरदराज का इलाका होने से यहां कोई जाना ही नहीं चाहते। 

अन्य ब्लॉकों में भी यही है स्थिति 

अन्य ब्लॉकों में भी लगभग ऐसी ही स्थिति देखने को मिलती है। शहरी इलाका और परिवहन के साधनों की उपलब्धता वाले ब्लॉकों में पदस्थ शिक्षकों की अच्छी-खासी संख्या है। जैसे आमला में 247 स्कूलों में 830 शिक्षक, घोड़ाडोंगरी में 293 स्कूलों में 1093, मुलताई में 181 स्कूलों में 833 शिक्षक पदस्थ हैं। अन्य ब्लॉकों में इसके विपरीत स्थिति है। 

इन ब्लॉकों में बेहद कम शिक्षक 

जिले के आठनेर ब्लॉक में 170 शिक्षकों में मात्र 588, भैंसदेही के 219 स्कूलों में 681, चिचोली के 178 स्कूलों में 512, प्रभातपट्टन के 183 स्कूलों में 644 और शाहपुर के 213 स्कूलों में 719 शिक्षक ही पदस्थ हैं। इन ब्लॉकों में शहरी इलाके कम हैं वहीं दूसरी ओर ब्लॉकों का आकार बड़ा होने से गांव भी दूर-दूर स्थित है। इसके अलावा परिवहन के साधनों की भी कमी है। यही कारण है कि इन ब्लॉकों में पदस्थ होने से शिक्षक बचना ही चाहते हैं। 

ग्रामीण बच्चों को झेलना पड़ रहा परेशानी

शिक्षकों के असमान वितरण का खामियाजा ग्रामीण बच्चों को भुगतना पड़ता है। बताया जाता है कि बैतूल शहर में कुछ स्कूलों में आलम यह है कि 15-20 बच्चे ही जिन स्कूलों में दर्ज हैं वहां पर 8-10 या इससे भी ज्यादा शिक्षक पदस्थ हैं। वहीं दूसरी ओर दूरदराज के ग्रामीण अंचलों में 50-100 बच्चे होने पर भी स्कूल में एक या दो ही शिक्षक हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि इन स्कूलों में कैसी और कितनी पढ़ाई हो पाती होगी। जाहिर है कि इससे पढ़ाई-लिखाई के मामले में ग्रामीण बच्चे लगातार पिछड़ते रहते हैं। जिले के जनप्रतिनिधि भी इस ओर कोई ध्यान नहीं देते, जिससे ग्रामीण बच्चों को उनका अधिकार नहीं मिल पाता।

जिले में स्कूल और शिक्षकों की संख्या 

विकासखंड स्कूलों की संख्या  शिक्षकों की संख्या 
आमला 247 830
आठनेर 170 588
बैतूल 285 1440
भैंसदेही 219 681
भीमपुर 309 754
चिचोली 178 512
घोड़ाडोंगरी 293 1093
मुलताई 181 833
प्रभातपट्टन 183 644
शाहपुर 213 719