भारत का तेजस प्रोजेक्ट पर पड़ा महायुद्ध का असर, इंजन और रडार की आपूर्ति में आई कमी
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध ने न केवल वैश्विक तेल बाजार में कोहराम मचाया है, बल्कि इसका गहरा और नकारात्मक असर भारत की सैन्य तैयारियों पर भी पड़ने लगा है। अमेरिका और इजरायल के एक महीने से अधिक समय से इस जंग में उलझे होने के कारण पूरी दुनिया में सप्लाई चेन बाधित हो गई है। इसका सबसे सीधा और बड़ा झटका भारतीय वायुसेना के महत्वाकांक्षी स्वदेशी फाइटर जेट तेजस मार्क-1ए प्रोजेक्ट को लगा है।
दरअसल, तेजस मार्क-1ए के निर्माण के लिए दो सबसे महत्वपूर्ण घटक इंजन और रडार क्रमशः अमेरिका और इजरायल से आने हैं। इस फाइटर जेट में अमेरिकी कंपनी जीई का एफ-404 इंजन लगाया जाना है। एचएएल और जीई के बीच इंजन आपूर्ति का बड़ा करार है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों और युद्ध के दबाव के कारण जीई इंजन की सुचारू आपूर्ति में बाधा आ रही है। यूक्रेन और मध्य-पूर्व के संकटों की वजह से कंपनी पर अमेरिकी और इजरायली वायुसेना के ऑर्डर्स को प्राथमिकता देने का भारी दबाव है। आलम यह है कि पिछले 90 दिनों से भारत को एक भी इंजन प्राप्त नहीं हुआ है, जबकि वादा हर माह दो इंजन देने का था। डिलीवरी में करीब दो साल की देरी के चलते अब तक वायुसेना को मिलने वाले 32 विमानों के मुकाबले एक भी जेट नहीं मिल सका है।
इंजन के साथ-साथ इजरायली रडार सिस्टम की आपूर्ति भी संकट में है। तेजस मार्क-1ए के शुरुआती बैच में इजरायली ईएल/एम-2052 एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड अरे रडार सिस्टम लगाया जाना तय हुआ था। यह रडार 150 से 200 किलोमीटर की रेंज में एक साथ 60 लक्ष्यों की पहचान करने में सक्षम है। चूँकि इजरायल खुद ईरान के साथ युद्ध में सीधे तौर पर उलझा हुआ है, इसलिए उसकी डिफेंस कंपनियां अपनी सेना की जरूरतों को पूरा करने को प्राथमिकता दे रही हैं। इसके परिणामस्वरूप, भारत को समय पर रडार की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस युद्ध ने पूरे डिफेंस इकोसिस्टम को प्रभावित किया है। यदि यही स्थिति रही, तो इसका असर केवल तेजस तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत के भविष्य के एम्का प्रोजेक्ट पर भी पड़ सकता है, जिसके प्रोटोटाइप में जीई के 414 इंजन लगाए जाने हैं।

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