अवैध रिश्ते से जन्मी संतान को भी पेंशन का अधिकार, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
पहली पत्नी को कानूनी हकदार मानते हुए भी बेटी के अधिकार को दी मान्यता, फैसला बन सकता है नजीर
कोलकाता। कोलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, कि अवैध रिश्ते से जन्मी संतान को भी पेंशन का अधिकार मिल सकता है। अदालत का यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम नजीर बन सकता है। यह मामला पूर्वी रेलवे में कार्यरत एक गेटमैन से जुड़ा था, जिसने अपनी पहली पत्नी को बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर ली थी। रिटायरमेंट के बाद उसने अपनी सर्विस और पेंशन बुक में पहली पत्नी और बेटे के बजाय दूसरी पत्नी और उससे जन्मी बेटी का नाम दर्ज करा दिया।
पहली पत्नी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। महिला का कहना था कि उसे मिर्गी की बीमारी के चलते पति ने छोड़ दिया और बिना जानकारी दिए दूसरी शादी कर ली। उसने यह भी आरोप लगाया कि 2012 के बाद से उसे कोई गुजारा भत्ता नहीं मिला, जबकि पहले उसे हर महीने 1000 रुपये देने का आदेश था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह स्पष्ट हुआ कि दंपति के बीच कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ था। ऐसे में जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि पहली पत्नी ही कानूनी रूप से पेंशन की हकदार है।
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी शादी भले ही हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध नहीं मानी जा सकती, लेकिन उस संबंध से जन्मी संतान के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आदेश दिया कि दूसरी पत्नी से जन्मी 15 वर्षीय बेटी का नाम भी सर्विस और पेंशन रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए यह सुनिश्चित किया कि पहली पत्नी के अधिकार सुरक्षित रहें, साथ ही निर्दोष संतान को उसके अधिकारों से वंचित न किया जाए। इस फैसले को सामाजिक न्याय और संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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