Betul Alderman Appointment: निकाय चुनाव से 15 माह पहले एल्डरमैन का झुनझुना: बैतूल के 10 निकायों में 48 नेताओं की बैकडोर एंट्री
Betul Alderman Appointment: बैतूल (राष्ट्रीय जनादेश)। अगले साल जून माह में होने वाले नगरीय चुनाव के मात्र 15 माह पूर्व सरकार ने नगरीय निकायों (नगर पालिका और नगर परिषद) में भाजपा नेताओं को एल्डरमैन का झुनझुना पकड़ाकर बैकडोर एंट्री करवाई है। नवनियुक्त एल्डरमैन निकायों की बैठक में शामिल होकर चर्चा में भी भाग ले सकते हैं लेकिन किसी महत्वपूर्ण मुद्दों पर वोटिंग होने की स्थिति में ये वोटिंग नहीं कर पाएंगे। यानि नवनियुक्त एल्डरमैन निकाय की बैठकों चर्चा में ज्ञान तो बांट सकते हैं लेकिन निर्णायकों भूमिका निभाने में असक्षम रहेंगे।
निकाय चुनाव के पूर्व सरकार ने असंतुष्ट नेताओं का मुंह बंद करने और निकाय क्षेत्रों में संतुलन बनाने एल्डरमैन नियुक्त कर दिए हैं ताकि 15 माह बाद होने वाले निकाय चुनावों में पार्टी को अंदरूनी विरोध का सामना न करना पड़े। सरकार द्वारा प्रदेश की 123 नगर परिषदों में 4-4 और 46 नगर पालिकाओं में 6-6 एल्डरमैन नियुक्त हैं। बैतूल जिले की 4 नगरीय पालिकाओं में 24 और 6 नगर परिषदारें में 24 कुल 48 एल्डरमैन नियुक्त किए गए हैं।
नगरीय निकायों में सरकार द्वारा सत्तारूढ़ दल की सिफारिश पर एल्डरमैन की नियुक्ति करती है ताकि पार्षद का चुनाव नहीं लड़ पाए या हार गए नेताओं को जिन्हें नगरीय निकायों की विस्तृत जानकारी हो एल्डरमैन बनाकर निकायों में बैकडोर एंट्री करवाती है। प्रदेश में मार्च 2020 से लगातार भाजपा की सरकार है। नगरीय निकाय चुनाव भी 45 माह पूर्व जून 2022 में हुए थे। सरकार यदि चाहती तो नगरीय निकाय चुनाव के तुरंत बाद ही एल्डरमैन की नियुक्ति कर सकती थी ताकि एल्डरमैन को परिषद में काम करने का मौका मिल पाता। प्रदेश की अधिकतर नगरीय निकायों में भाजपा का कब्जा है।
जिले की 10 नगरीय निकायों में से 8 में भाजपा काबिज है। इसके चलते सरकार ने एल्डरमैन की नियुक्ति का मसला ठण्डे बस्ते में डाल दिया था। अब जब नगरीय निकाय चुनाव को मात्र 15 माह का समय बचा है और अध्यक्ष का चुनाव जनता द्वारा किया जाना है ऐसे समय में पार्टी किसी भी प्रभावी नेता को असंतुष्ट रखने का जोखिम उठाने के मूड में नहीं है।
भले 15 माह के लिए ही सही उन्हें एल्डरमैन बनाकर पार्टी न सिर्फ चुनाव के पूर्व इन नेताओं को एडजेस्ट कर रही है बल्कि क्षेत्रीय संतुलन बनाकर नगरीय निकाय चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है ताकि चुनाव के दौरान कहीं भी भीतरघात का सामना न करना पड़े। पार्टी प्रत्यक्ष प्रणाली से होने वाले निकाय चुनाव में पूरी ताकत से उतर सके। संभवत: इसी सोच के चलते सरकार ने आनन-फानन में एल्डरमैन नियुक्त कर इन्हें परिषद में एंटर करवाया है।
नगर पालिका परिषदों में यह बने एल्डरमैन
बैतूल: श्रीमती रश्मि जुगल किशोर साहू, मनप्रीतसिंह (मिन्ना) देवेंदरसिंह अहलूवालिया, सावन्या रामचरण शेषकर, नीतेश शिवकुमार वर्मा, राजू अमरचंद सोनकपुरिया, कैलाश भोलाराम यादव।
आमला: गोपेंद्र मानसिंह बघेल, सपना वेवेंद्र सोनी, बसंत गुलाबराव ओडुकले, गोपाल ब्रजलाल खतारे, सुरेखा पंढरी मराठे, आरती हरिदास पाटिल।
मुलताई: सुनिता श्रवण कुमार नागले, बीना बिसनलाल पंजाबी, श्यामू देवराव ढोमने, प्रीतमसिंह करणसिंह सिसोदिया, राजू नारायणराव चौबे, नीलेश महेश चावरिया।
सारनी: रमेश किशन पंवार, विनय हरीशचंद्र मदने, सरोज रामपाल विश्वकर्मा, सुनीता मुकेश यादव, रमेश परसराम होरोड़े, संजीत भजू चौधरी।
नगर परिषदों में यह बने एल्डरमैन
बैतूल बाजार: कमलेश चिंधुलाल राठौर, दीपक किशोरीलाल वर्मा, चंद्रकांत गंगाधरराव जोशी, कांति गोरेलाल पंवार।
आठनेर: महेश शंकरलाल लहरपुरे, संजय किशोरीलाल सोनी, रोशन कृष्णराव झोड, किरण नरेंद्र जोगी।
चिचोली: अमित गोविंदराव देशपांडे, कृष्णा राजकुमार सोनी, अमरसिंह सुंदरलाल राठौर, प्रकाश शिवदीन कटारे।
घोड़ाडोंगरी: प्रशांत केशवराव गावंडे, प्रिया राकेश अरोरा, विकास नाथूराम अग्रवाल, कमलेश ललित कुमार जैन।
शाहपुर: अरूण चंद्रगोपाल तिवारी, डॉ. प्रद्युम्र कुमार रामप्रसाद जैन, रूपलता उमेश चौधरी, सरला डालचंद्र वर्मा।
भैंसदेही: लक्ष्मीनारायण वि_ल राठौर, विनोद सदाशिवराव सोनी, रवि वि_लराव कुबड़े, सुरेश नत्थूलाल पाल।

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