अंतरिक्ष यात्री ने जशपुर होम-स्टे में चखा देसी स्वाद, पर्यटक हुए खुश
CG News: प्रदेश का स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले जशपुर जिले में ग्रामीण पर्यटन की बयार बहने लगी है। जिला प्रशासन की होम-स्टे पहल अब न केवल रंग ला रही है, बल्कि बाहरी राज्यों के पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बन गई है। केरे, किनकेल, देवबोरा और मयाली जैसे गांवों में संचालित इन होम-स्टे ने जशपुर की हरियाली, जलप्रपातों और समृद्ध आदिवासी संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की शुरुआत कर दी है।
जशपुर के होम-स्टे की लोकप्रियता उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गई, जब भारत के दूसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अपने प्रवास के दौरान केरे-देशदेखा के होम-स्टे में ठहरे। उन्होंने वहां की सादगी, पारंपरिक भोजन और ग्रामीणों की आत्मीयता की जमकर सराहना की। इस हाई-प्रोफाइल विजिट के बाद स्थानीय पर्यटन को एक नया आत्मविश्वास मिला है।
स्वदेश दर्शन 2.0: 20 करोड़ से संवरेगा मयाली-बगीचा
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन के अनुरूप, जशपुर को इको-टूरिज्म और एडवेंचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है। हाल ही में स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत करीब 20 करोड़ रुपए की लागत वाली मयाली-बगीचा परियोजना का भूमिपूजन किया गया है। इस परियोजना के जरिए मयाली क्षेत्र में रिसॉर्ट, पाथवे और आधुनिक सुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
सुकून की तलाश में पहुंच रहे पड़ोसी राज्यों के मेहमान
झारखंड, मध्य प्रदेश और रायपुर जैसे शहरों की भागदौड़ से दूर पर्यटक अब जशपुर की वादियों का रुख कर रहे हैं। पर्यटकों का कहना है कि यहां की पहाड़ी नदियों और झरनों के बीच होम-स्टे में ठहरना एक अनूठा अनुभव है। स्थानीय व्यंजनों का स्वाद और ग्रामीणों की सहज मेहमाननवाजी शहरी जीवन के तनाव को कम करने में 'थेरेपी' की तरह काम कर रही है।

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